पंजाब में एक बार फिर बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। मौसम विभाग की ओर से दी गई भारी बारिश की चेतावनी के मद्देनज़र पौंग डैम के फ्लड गेट खोल दिए गए हैं और ब्यास नदी में 50 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। बता दें कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की भविष्यवाणी को देखते हुए शुक्रवार को तकनीकी समिति की बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया था।
फैसले के अनुसार, पौंग डैम पावर हाउस की टर्बाइनों से अधिकतम निकासी और स्पिलवे गेटों से करीब 32,000 क्यूसेक पानी सहित कुल 50,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जाना तय हुआ था, जिसे अब छोड़ दिया गया है। पानी छोड़ने से पहले सायरन बजाया गया और फिर यह पानी छोड़ा गया। इसके बाद आसपास के इलाकों में फिर से बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। डैम से पानी छोड़े जाने के चलते गुरदासपुर, अमृतसर और फिरोज़पुर जिलों में खतरा मंडराने लगा है।

इस संबंध में डिप्टी कमिश्नर कांगड़ा (धर्मशाला), एस.डी.एम. फतेहपुर, एस.डी.ਐਮ. इंदौरा, एस.ਡੀ.ਐਮ. देहरा, सिंचाई और बी.बी.एम.बी. (चंडीगढ़) के सदस्य, सचिव, मुख्य इंजीनियर, ब्यास डैम, बी.बी.ਐਮ.ਬੀ. तलवाड़ा टाउनशिप और जल नियंत्रण निदेशक बी.ਬੀ.ਐਮ.ਬੀ. नंगल टाउनशिप को सूचित कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश की संबंधित सिविल, सिंचाई, ड्रेनेज और बाढ़ नियंत्रण अथॉरिटीज़ को इस संबंध में सभी ज़रूरी रोकथाम और तैयारी वाले कदम उठाने को कहा गया है।
लोगों के लिए अलर्ट
- अमृतसर के डी.सी. ने आदेश जारी करते हुए कहा कि बारिश और डैम से पानी छोड़े जाने के कारण रावी और ब्यास नदियों का जलस्तर ऊपर-नीचे हो सकता है।
- नागरिकों को 10 अक्टूबर तक नदियों को पार न करने की हिदायत दी गई है।
- किसानों और पशुपालकों को अपने पशुओं को नदी के किनारे या अंदर न ले जाने की सलाह दी गई है।
- मौसम विशेषज्ञों ने लोगों को गरज-चमक या तेज़ हवाओं की स्थिति में घरों में रहने, पेड़ों के नीचे शरण न लेने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।
- नेशनल हाईवे पर दर्दनाक हादसा: अज्ञात वाहन की टक्कर से 65 वर्षीय वृद्ध की मौत, चालक फरार
- बेटे के वियोग में टावर पर चढ़ी महिला, लंबी मिन्नतों के बाद उतरी नीचे, जानें क्या है पूरा मामला
- CG News : 36 अधिवक्ताओं को सीनियर काउंसिल का दर्जा, हाईकोर्ट में केंद्र सरकार का रखेंगे पक्ष
- ‘सामाजिक बुराई का सबसे घिनौना उदाहरण…’, कन्या भ्रूण हत्या पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी
- अव्यवस्थाओं के साये में पढ़ाई और बोर्ड परीक्षा : खपरा वाले जर्जर कमरों में भविष्य लिखने को मजबूर बच्चे…न समुचित व्यवस्था, न सुरक्षित भवन, हादसे का बना रहता है खतरा


