श्री आनंदपुर साहिब : पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने बीते शुक्रवार, 11 जुलाई को श्री आनंदपुर साहिब में तख्त श्री केसगढ़ साहिब और गुरुद्वारा श्री सीसगंज साहिब में माथा टेका। इस दौरान उन्होंने तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज के साथ उनके निवास कार्यालय में विशेष मुलाकात की। इस अवसर पर जत्थेदार गड़गज और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के सदस्य भाई अमरजीत सिंह चावला ने राज्यपाल कटारिया को सिरोपा, लोई और तख्त श्री केसगढ़ साहिब की तस्वीर भेंट की।
मुलाकात के दौरान राज्यपाल कटारिया और जत्थेदार गड़गज ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इनमें श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित शताब्दी समारोह, श्री गुरु ग्रंथ साहिब और अन्य धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के मामलों में सख्त कानून बनाने की आवश्यकता, चमकौर साहिब और मत्तेवाड़ा जंगल के निकट प्रस्तावित पेपर फैक्ट्री के आसपास रहने वाले गरीब परिवारों के विस्थापन, पंजाब में पुलिस मुठभेड़ और धर्म परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दे शामिल रहे।
मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि राज्यपाल के साथ बातचीत बहुत ही सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। उन्होंने बताया कि राज्यपाल ने उठाए गए सभी मुद्दों को ध्यानपूर्वक सुना और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। जत्थेदार ने कहा कि राज्यपाल को श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को देश और दुनिया भर में मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के उनके सिद्धांतों के अनुरूप भव्य तरीके से मनाने की आवश्यकता बताई गई।

शहीदी दिवस और मत्तेवाड़ा पेपर फैक्ट्री पर जोर
जत्थेदार ने सुझाव दिया कि श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी दिवस पंजाब और केंद्र सरकार द्वारा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सहयोग और सलाह-मशविरे से मनाया जाना चाहिए, क्योंकि यह सिख समुदाय की केंद्रीय धार्मिक संस्था है और गुरमत समागमlalalaमों में सिख परंपराओं, रीति-रिवाजों और सिद्धांतों का बेहतर ढंग से प्रतिनिधित्व करती है।
इसके अलावा, जत्थेदार ने चमकौर साहिब के निकट प्रस्तावित पेपर फैक्ट्री के मुद्दे को भी उठाया, जिसका स्थानीय लोग कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह फैक्ट्री महान साहिबजादों के शहीदी स्थल के पास प्रदूषण फैलाएगी, जो लोगों की सेहत और पंजाब के पर्यावरण, हवा और पानी के लिए हानिकारक है। साथ ही, मत्तेवाड़ा जंगल के पास रहने वाले गरीब परिवारों के विस्थापन का मुद्दा भी उठाया गया। जत्थेदार ने कहा कि ये परिवार लंबे समय से वहां रह रहे हैं, और उनका विस्थापन उचित नहीं है। यह मानवाधिकारों के लिए गंभीर झटका है और पंजाब की प्रकृति के अनुरूप नहीं है।
राज्यपाल ने सभी मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया, जिससे इन समस्याओं के समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए जाने की उम्मीद है।
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