अमृतसर। पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरजोत बैंस ने श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा दी गई धार्मिक सजा पूरी करने के बाद सच्चखंड श्री हरिमंदिर साहिब में नतमस्तक होकर वाहेगुरु का शुक्राना किया। इस दौरान उन्होंने 1100 रुपये की कड़ाह प्रसाद की देग चढ़ाई। बैंस को श्रीनगर में नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादर साहिब के 350वें शहीदी समारोह के दौरान गीत और भांगड़ा विवाद के चलते तनखाहिया (धार्मिक सजा प्राप्त व्यक्ति) घोषित किया गया था। श्री अकाल तख्त साहिब की फसील से उन्हें यह सजा सुनाई गई थी।
मंत्री बैंस ने कहा कि उनकी राजनैतिक और निजी जिंदगी की हर सफलता केवल गुरु साहिब की रहमत और छठवें पातशाह धन गुरु हरगोबिंद साहिब जी की कृपा से संभव हुई है। उन्होंने कहा, “मेरे पास ऐसा कोई गुण नहीं जिस पर मैं गर्व कर सकूं। मेरी हर उपलब्धि गुरु साहिब की बख्शीश है।” बैंस ने बताया कि 6 अगस्त को श्री अकाल तख्त साहिब से मिला हुक्म उनके लिए पिता समान गुरु का आदेश था, जिसे उन्होंने पूरे मनोयोग से पूरा किया। सजा पूरी होने के बाद उन्होंने गुरु साहिब के चरणों में अरदास की, जिसमें उन्होंने पंथ, कौम, देश और पंजाब की सेवा के लिए बल मांगा और अपनी भूलों के लिए पंथ से माफी मांगी।

धार्मिक सजा के साथ-साथ बैंस ने आर्थिक योगदान भी दिया। उन्होंने अपने निजी फंड से 20 लाख रुपये, एक महीने की व्यक्तिगत तनख्वाह और दसवंध के माध्यम से धार्मिक स्थानों के रास्तों की मरम्मत और अन्य सेवाओं के लिए सहयोग दिया। बैंस ने कहा कि वे मंत्री और सेवक दोनों रूपों में धर्म और समाज की सेवा के लिए हमेशा तत्पर हैं।
यह मामला श्री गुरु तेग बहादर साहिब के 350वें शहीदी समारोह से जुड़ा है, जो पंजाब के भाषा विभाग द्वारा आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में गायक वीर सिंह ने गीत प्रस्तुत किया, जिस पर कुछ लोगों ने नाच-गाना किया। इस दौरान मंत्री हरजोत बैंस भी मौजूद थे। चूंकि भाषा विभाग उनके अधीन है, इसलिए श्री अकाल तख्त साहिब ने उन्हें तलब किया और धार्मिक सजा सुनाई।
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