पूर्णिया। जिले के मेडिकल कॉलेज में दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर एमबीबीएस में नामांकन लेने वाले छात्रों के प्रमाणपत्रों की बड़े स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है। प्राचार्य ने निर्देश जारी करते हुए पिछले तीन वर्षों में दिव्यांगता श्रेणी से दाखिला लेने वाले सभी 18 छात्रों के दस्तावेजों की जांच कराने को कहा है। कॉलेज प्रशासन ने उन सभी संस्थानों को पत्र भेजकर पुष्टि मांगी है जहां से ये दिव्यांगता प्रमाण पत्र निर्गत बताए गए हैं। इनमें कोलकाता, बीएचयू, चंडीगढ़, गोवा सहित कई स्थानों के मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।
एक छात्र का प्रमाण पत्र फर्जी
जांच प्रक्रिया तब शुरू हुई जब 2025-29 सत्र में नामांकन लेने वाले कार्तिक यादव का दिव्यांगता प्रमाण पत्र संदिग्ध पाया गया। गोवा मेडिकल कॉलेज को भेजे गए सत्यापन पत्र का कोई जवाब न मिलने के बाद कॉलेज के नामांकन शाखा प्रभारी की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि कार्तिक को फर्जी प्रमाण पत्र नोएडा में बैठे गिरोह के सरगना द्वारा 30-35 लाख रुपये में उपलब्ध कराया गया था। यह नेटवर्क कई राज्यों में सक्रिय बताया जा रहा है।
न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस कार्तिक की मेडिकल जांच सक्षम संस्थान या IGIMS में कराएगी। इसी मामले में कार्तिक के साथ आया ANMMC का द्वितीय वर्ष का छात्र कुणाल कुमार भी दबाव बनाने के आरोप में गिरफ्तार हुआ है।
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें


