ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर जरूर हुआ है, लेकिन जैसे हालात है उसे देखते हुए ऐसा लग नहीं रहा कि यह शांति ज्यादा दिन चलने वाली है. पाकिस्तान जो दोनों देशो के बीच मध्यस्था कराने के नाम पर अपनी पीठ थपथपा रहा था उसकी भी हवा निकल चुकी है. ऐसे में अब तनाव एक नई कूटनीतिक हलचल सामने आई है. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिका और ईरान के बीच जंग में शांति के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है. पुतिन ने रविवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से कहा कि वह मिडिल ईस्ट में शांति लाने की कोशिशों में मदद करने के लिए तैयार हैं.

क्रेमलिन ने दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत के बारे में बताते हुए कहा, “व्लादिमीर पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि वह इस जंग के राजनीतिक और कूटनीतिक हल की तलाश को और आसान बनाने और मिडिल ईस्ट में सही और पक्की शांति लाने की कोशिशों में मदद करने के लिए तैयार हैं.”

बेनतीजा रही पाकिस्तान में बातचीत

गौरतला है कि, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता बेनतीजा खत्म हो गई. पाकिस्तान में हुई 21 घंटे लंबी बातचीत के बाद भी कोई समझौता नहीं हो सका. हालांकि राहत की बात यह रही कि तुरंत लड़ाई फिर से शुरू नहीं हुई और एक जर्जर युद्धविराम अभी भी टिका हुआ है. इस असफल वार्ता ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। अगर दोबारा संघर्ष शुरू होता है, तो इसका असर सीधे वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है. खाड़ी क्षेत्र में तेल और गैस सुविधाओं पर खतरा बढ़ सकता है और ऊर्जा कीमतें आसमान छू सकती हैं.

रूस ने अमेरिका पर लगाया आरोप

रूस ने अमेरिका पर यह भी आरोप लगाया है कि वह ईरान से एक काल्पनिक खतरे का इस्तेमाल अपने संवैधानिक सिस्टम को खत्म करने के बहाने के तौर पर कर रहा है और कहा कि ईरानियों से उनके नेताओं से सत्ता छीनने की वाशिंगटन की अपील निंदनीय और अमानवीय थी.

जून 2025 में भी, जब बारह दिन की लड़ाई चल रही थी, पुतिन ने इजराइल और ईरान के बीच रूस की तरफ से बीच-बचाव की पेशकश की थी, यह कहते हुए कि ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर झगड़े राजनीतिक और डिप्लोमैटिक तरीके से सुलझाए जाने चाहिए, लड़ाई से नहीं इसे नहीं सुलझाया जा सकता है.

इस्लामाबाद से क्या लेकर आए जेडी वेंस?

अमेरिका की ओर से वार्ता का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान से अमेरिका लौट चुके हैं. जाते-जाते उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अमेरिका ने ईरान को अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव दे दिया है.

अब फैसला ईरान को करना है कि वह इसे स्वीकार करता है या नहीं. वहीं ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष कालिबाफ ने कहा कि उनकी टीम ने कई सकारात्मक प्रस्ताव रखे, लेकिन अमेरिकी पक्ष उनका भरोसा जीतने में नाकाम रहा. तसल्ली की बात ये है कि सीजफायर के बाद से दोनों पक्षों ने अब तक कोई हमला नहीं किया है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह नाजुक शांति बनी रहती है या फिर मध्य पूर्व एक बार फिर युद्ध की आग में झोंक दिया जाएगा.

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