पटना। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को IRCTC घोटाला मामले में कोई स्थायी राहत नहीं मिली है। शनिवार को दिल्ली की राऊज एवेन्यू अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने जज विशाल गोंगने को हटाकर किसी दूसरी बेंच में केस ट्रांसफर करने की मांग की थी।

जल्दबाजी में फैसला सुना देने की तैयारी में

लालू परिवार के वकील ने तर्क दिया था कि जज विशाल गोंगने पक्षपाती रवैया अपनाए हुए हैं और जून 2026 तक जल्दबाजी में फैसला सुना देने की तैयारी में हैं। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत ने कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया है। अदालत ने हालांकि उनकी याचिका सुनने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा और अगली सुनवाई 9 दिसंबर को तय की गई है।

कुल 103 आरोपी शामिल हैं

इस घोटाले में कुल 103 आरोपी शामिल हैं, जिनमें से अधिकांश पटना और अन्य दूरस्थ जिलों से हैं। वकीलों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में आरोपियों और विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले लोगों को दिल्ली बुलाए जाने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी व चुनावी गतिविधियों में बाधा हुई है।

समूहों को अनुचित लाभ दिलाया

CBI ने आरोप लगाया है कि राबड़ी देवी और उनके परिवार के करीबी लोगों ने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए IRCTC एवं अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से कोचर ब्रदर्स व उनसे जुड़े व्यवसायिक समूहों को अनुचित लाभ दिलाया। आरोप है कि पटना की कीमती जमीन को DMCP एलएलपी नामक कंपनी को बेचा गया जिसे बाद में Lara Projects LLP में बदल दिया गया।

याचिका पर पुनर्विचार की संभावना

इस कंपनी का संचालन राजद से जुड़े एक राज्यसभा सदस्य व पार्टी के करीबी लोग कर रहे थे। हालांकि राबड़ी देवी की ओर से कहा गया है कि यह पूरा घटनाक्रम राजनीतिक षड़यंत्र है। अदालत ने फिलहाल ट्रांसफर की मांग मानने से इनकार कर दिया है। 9 दिसंबर को अगली सुनवाई होगी, जिसमें याचिका पर पुनर्विचार की संभावना है।