Radish Side Effects: ठंड के मौसम में मूली को पसंदीदा, स्वादिष्ट और हेल्दी सब्जी माना जाता है. इसके सेवन से कई फायदे मिलते हैं और इसे अलग-अलग रूपों में खाया जाता है. सुबह गरमा-गरम मूली के पराठे बहुत से लोगों का पसंदीदा नाश्ता होते हैं. वहीं कई लोग इसकी सब्जी, कबाब, पकौड़े, चटनी या दूसरी डिश बनाकर खाते हैं.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह सफेद जड़ हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं होती? आयुर्वेद और विज्ञान दोनों मानते हैं कि कुछ खास शारीरिक स्थितियों में मूली का सेवन फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकता है. आज हम आपको बता रहे हैं कि किन लोगों को मूली खाने से बचना चाहिए.
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थायरॉइड, खासकर हाइपोथायरॉइड के मरीज: कच्ची मूली में गोइट्रोजन तत्व हो सकते हैं, जो आयोडीन के अवशोषण में रुकावट डालते हैं. ऐसे लोगों को कच्ची मूली से बचना चाहिए. पकी हुई मूली सीमित मात्रा में ली जा सकती है.
पेट की समस्या वाले लोग, जैसे गैस, एसिडिटी या IBS: मूली वात बढ़ाती है. इससे गैस, पेट दर्द, जलन या दस्त की समस्या बढ़ सकती है, खासकर कच्ची मूली खाने से.
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पित्त की अधिकता या एसिड रिफ्लक्स: आयुर्वेद के अनुसार मूली पित्त को उत्तेजित कर सकती है. इससे सीने में जलन और खट्टी डकारें बढ़ सकती हैं.
किडनी स्टोन यानी पथरी का इतिहास: कुछ लोगों में मूली में मौजूद ऑक्सलेट्स पथरी की समस्या को बढ़ा सकते हैं. ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
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गॉलब्लैडर स्टोन या पित्ताशय की समस्या: मूली पित्त स्राव को प्रभावित कर सकती है, जिससे दर्द या बेचैनी बढ़ सकती है.
लो ब्लड प्रेशर, यानी हाइपोटेंशन: मूली ब्लड प्रेशर को थोड़ा कम कर सकती है. ज्यादा सेवन करने से चक्कर या कमजोरी महसूस हो सकती है.
एलर्जी या संवेदनशीलता: यह समस्या कम लोगों में होती है, लेकिन कुछ लोगों को मूली खाने से खुजली, सूजन या पेट खराब हो सकता है.
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ऐसे खाएं ताकि नुकसान न हो
1- कच्ची मूली की बजाय पकी हुई मूली, जैसे सब्जी या पराठे में, खाना बेहतर रहता है.
2- सर्दियों में भी मूली सीमित मात्रा में ही खाएं.
3- गैस से बचने के लिए मूली को अजवाइन या हींग के साथ पकाएं.
4- रात के समय कच्ची मूली खाने से बचें.
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