रविंद्र कुमार भारद्वाज, रायबरेली. पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से पर्सनल लोन दिलाने वाले एक बड़े और संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है. थाना कोतवाली नगर पुलिस टीम ने लालगंज रोड स्थित राणा नगर कब्रिस्तान के पास से इस गिरोह के 05 सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है. यह बड़ी कार्रवाई बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर दर्ज एक गंभीर धोखाधड़ी के मामले में की गई है, जिसमें लाखो रुपये के फर्जी लोन स्वीकृत किए गए थे.
बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा, रायबरेली में कुल 48 पर्सनल लोन बैंक खातों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा कर लोन पास कराए गए थे. प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि लोन लेने वाले खाताधारकों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी सैलरी स्लिप, जाली नियुक्ति पत्र और आधार कार्ड पर पते में हेरफेर जैसे हथकंडों का इस्तेमाल कर इन लोनों को हासिल किया था. बैंक ऑफ बड़ौदा के अधिकारियों द्वारा की गई गहन आंतरिक जांच के बाद, मुख्य प्रबंधक मुकेश ने 29 दिसंबर 2025 को थाना कोतवाली नगर में 48 पर्सनल लोन खाताधारकों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया था.
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पुलिस अधीक्षक रायबरेली रवि कुमार के निर्देशन में, अपर पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सिन्हा के कुशल पर्यवेक्षण और क्षेत्राधिकारी नगर अरुण कुमार नौहवार के नेतृत्व में एक विशेष पुलिस टीम का गठन किया गया. इस टीम ने आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और धरातलीय साक्ष्य संकलन के माध्यम से महत्वपूर्ण सुराग जुटाए और आरोपियों तक पहुंचने में कामयाबी हासिल की. आज गिरफ्तार किए गए 05 अभियुक्तों में राजेश सिंह, बब्लू राठौर, गोपाल सिंह, राधिका देवी और कामिनी राठौर शामिल हैं. गिरफ्तारी के बाद मुकदमे में धारा-61(2) बीएनएस की बढ़ोत्तरी की गई है. सभी गिरफ्तार अभियुक्तों के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजा जा रहा है.
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि गिरोह के शेष सदस्यों की पहचान कर ली गई है और उन्हें भी शीघ्र ही गिरफ्तार कर इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जाएगा. पुलिस पूछताछ में अभियुक्तों ने अपने अपराध करने के तरीके का खुलासा किया, जो बेहद शातिराना और संगठित था. उन्होंने बताया कि वे अपने जानकार और रिश्तेदारों के बैंक खाते रायबरेली बैंक ऑफ बड़ौदा की मुख्य शाखा में ट्रांसफर करवाते थे या नए खाते खुलवाते थे. इसके बाद, वे उन लोगों के आधार कार्ड पर पते में बदलाव करवाते थे. गिरोह का मुख्य सरगना गोपाल सिंह अपनी पत्नी राधिका देवी के नाम से यूको बैंक में ‘ट्रेजर’ के नाम से एक खाता खुलवाता था. इसी खाते का उपयोग कर फर्जी सैलरी स्लिप तैयार की जाती थी और जाली नियुक्ति पत्र के दस्तावेज लगाकर इन खातों पर पर्सनल लोन स्वीकृत कराए जाते थे. बब्लू राठौर और उनकी पत्नी कामिनी राठौर ने स्वयं फर्जी सैलरी स्लिप, फर्जी नियुक्ति पत्र और आधार कार्ड पर पता बदलकर 38 लाख 90 हजार रुपये का पर्सनल लोन लिया था. पुलिस इस बड़े धोखाधड़ी रैकेट के पीछे के सभी पहलुओं को उजागर करने के लिए जांच कर रही है.
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