पटना। होली के अवसर पर घर लौटने की चाहत यात्रियों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं साबित हो रही है। नई दिल्ली, मुंबई और हरियाणा जैसे शहरों से पटना पहुंचने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ के कारण स्लीपर और थर्ड एसी कोचों की स्थिति जनरल बोगियों जैसी हो गई है। आलम यह है कि आरक्षित सीटों पर बिना टिकट यात्रियों का कब्जा है और गैलरी में पैर रखने तक की जगह नहीं बची है।
जमीनी हकीकत और यात्रियों का दर्द
दिल्ली से आए प्रेम कुमार और गोपाल पासवान जैसे यात्रियों का कहना है कि प्रशासन के दावे कागजी हैं। कोच के भीतर वॉशरूम जाने तक का रास्ता नहीं है। बच्चों और महिलाओं के साथ सफर करना दुस्वप्न जैसा हो गया है। कई यात्रियों ने बताया कि भीड़ के कारण उनकी ट्रेनें छूट गईं और घंटों प्लेटफॉर्म पर इंतजार करना पड़ा। मजदूरों से लेकर परिवार के साथ घूमने निकले लोगों तक, सभी का अनुभव एक जैसा रहा-ट्रेन में व्यवस्था नाम की चीज नहीं थी।
दावे फेल, सुरक्षा नदारद
पटना जंक्शन पर स्थिति तब और बिगड़ गई जब उतरने और चढ़ने वाले यात्री आपस में भिड़ गए। रेलवे ने भीड़ नियंत्रण के लिए ‘होल्डिंग एरिया’ और अतिरिक्त स्टाफ के जो वादे किए थे, वे धरातल पर कहीं नजर नहीं आए। यात्रियों का आरोप है कि प्लेटफॉर्म पर न तो आरपीएफ सक्रिय थी और न ही जीआरपी सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ‘भगवान भरोसे’ दिखी।
स्पेशल ट्रेनों का सहारा, फिर भी संघर्ष जारी
हालांकि, पूर्व मध्य रेलवे (ECR) ने यात्रियों के दबाव को देखते हुए 58 स्पेशल ट्रेनें चलाने की घोषणा की है। ये ट्रेनें दिल्ली, मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ेंगी। रेलवे अधिकारियों का दावा है कि अतिरिक्त कोच जोड़े जा रहे हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए ये प्रयास ऊंट के मुंह में जीरे के समान लग रहे हैं। फिलहाल, यात्रियों के लिए घर पहुंचने की खुशी सफर की पीड़ा के आगे फीकी पड़ गई है।
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