Raipur News: प्रतीक चौहान. रायपुर के एक स्कूल का प्रापर्टी विवाद अब थाने पहुंच गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने समझाइश के लिए थाने में ही तहसील ऑफिस के अधिकारियों की टीम बुलानी पड़ी और दोनो पक्षों को मामले आपस में ही सुलझा लेने की नसीहत दी गई. हालांकि मामला इतना आसान नहीं है, इस पूरे मामले में करोड़ों का खेल हो गया.

आज सुबह हुए स्कूल में विवाद के बाद पहुंची पुलिस

कुछ वर्षों पहले दो दोस्तों ने मिलकर नवरंग पब्लिक स्कूल की नींव रखी. इसके बाद स्कूल के संचालन के लिए सोसायटी का गठन किया. बाकी स्कूलों की तरह यहां भी कागजों में शिक्षा विभाग से अनुमति के नाम पर कई खेल हुए. इस स्कूल का संचालन 2010 से चल रहा है. शासकीय जगह को स्कूल का ग्राउंड बता दिया गया, जैसे कई खेल कागजों में हुए. शिक्षा विभाग में पदस्थ शिक्षाकर्मी वीरेंद्र पांडे और मंजू परिहार ने मिलकर इस स्कूल को शुरू किया. अब यहां ये कहना गलत नहीं होगा कि बिना शिक्षा विभाग की मिलीभगत के एक शासकीय कर्मचारी वीरेंद्र पांडे (वर्तमान में छछानपैरी पैरी शासकीय मीडिल स्कूल में पदस्थ) अपनी निजी स्कूल का संचालन नहीं कर सकते.

जब दोनो दोस्तों में मधुर संबंध थे तो समिति का अध्यक्ष मंजू परिहार को बनाया गया. धीरे-धीरे स्कूल आगे बढ़ते गई और करोड़ों का साम्राज्य खड़ा होता गया. इसके बाद धीरे-धीरे दोनो दोस्तों के मधुर संबंध में तब दरारे और आनी बढ़ गई जब वीरेंद्र पांडे समिति की कमाई से अपनी निजी प्रापर्टी खरीदते गए और समिति में अपने परिजनों की एंट्री करवाई.

पीड़िता द्वारा स्कूल के बाहर बनाई गई वीडियो जो उन्होंने लल्लूराम डॉट कॉम को उपलब्ध कराई

इसके बाद हुआ कुछ यूं कि उन्होंने मंजू परिहार को अध्यक्ष पद से हटाकर अपने बेटे को समिति का अध्यक्ष बनाकर इसका संचालन खुद करने लगे. इसी बीच उन्होंने मंजू परिहार के नाम की प्रापर्टी में करोड़ों का लोन लिया और एक लोन पटाने के बाद करीब 1 करोड़ से अधिक का और टॉपअप लोन लिया. लेकिन विवाद बढ़ता ही गया और मामला पुलिस के पास पहुंचा.

चूंकि पूरा विवाद प्रापर्टी का है इसलिए पुलिस ने भी तहसील ऑफिस से अधिकारियों की टीम को बुला लिया और वहां दस्तावेजों की जांच के बाद ये स्पष्ट हुआ कि प्रापर्टी मंजू परिहार की है जिसमें स्कूल किराये से वहां है और उन्होंने पिछले करीब 10 महीने से कोई भी किराया नहीं दिया जिसके बाद ये विवाद बढ़ता गया.

शिकायतकर्ता मंजू परिहार ने लल्लूराम डॉट कॉम को बताया कि उन्होंने पूरे मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्ल्यू से भी की है. क्योंकि पूरा मामला शासकीय कर्मचारी और उनके परिवार के करोड़ों की प्रापर्टी से जुड़ा हुआ है इसलिए जहां-जहां वो शिकायत लेकर जाती है वहां कोई भी कार्रवाई नहीं होती है.

अब मामला पुलिस के पास पहुंचा है और पुलिस ने आज दोनो पक्षों को थाने में बुलाकर आपसी सहमति से समझौता करने की बात कही है, ताकी स्कूली बच्चों का भविष्य खराब न हो.