सुप्रिया पाण्डेय, रायपुर। शहर के पुलिस लाइन परिसर में बड़ी संख्या में पीपीई किट पाए जाने से हड़कंप मच गया है। परिसर के एक हिस्से में ये सभी पीपीई किट पैकेट में बंद अवस्था में फेंकी गई थीं, वहीं कुछ किट को जलाने की कोशिश किए जाने के भी स्पष्ट संकेत मिले हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक एक पीपीई किट की कीमत लगभग 1800 रुपये बताई जा रही है, जिससे सरकारी संपत्ति के भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।

इस मामले को और भी चौंकाने वाला बनाने वाली बात यह है कि बरामद की गई पीपीई किट वर्ष 2020 की बताई जा रही हैं। यह वही दौर था जब देशभर में कोरोना महामारी चरम पर थी और अस्पतालों में पीपीई किट की भारी किल्लत थी। कई जगहों पर डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण न मिलने की शिकायतें सामने आ रही थीं। ऐसे हालात में अब 2020 की बनी पीपीई किट का यूं लावारिस हालत में मिलना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि अगर ये पीपीई किट कोरोना काल के दौरान मौजूद थीं, तो उन्हें उस समय उपयोग में क्यों नहीं लाया गया। क्या यह लापरवाही थी या फिर किसी स्तर पर गंभीर चूक हुई, इस पर अब सवाल उठने लगे हैं। इसके साथ ही यह भी संदेह जताया जा रहा है कि इन किटों को नष्ट करने की कोशिश क्यों की गई और इसके पीछे किसका निर्देश था।

मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये पीपीई किट कहां से लाई गईं, किस विभाग के स्टॉक से संबंधित थीं और इन्हें पुलिस लाइन परिसर में फेंकने का फैसला किसने लिया।

फिलहाल जिस तरह से कोरोना काल की महत्वपूर्ण सुरक्षा सामग्री को इस तरह फेंका गया है, उसने एक बार फिर महामारी के दौरान संसाधनों के प्रबंधन और जवाबदेही को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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