अंकित तिवारी, बरेली (रायसेन)। मध्य प्रदेश के रायसेन में कचरा गाड़ी में मिली नवजात की गुत्थी 24 घंटे के अंदर सुलझ गई। आरोपी महिला घर में काम करने वाली बाई है। जिसने अपने मालिक के दिए टी शर्ट में लपेटकर बच्ची को फेंका था। 

जिस टी शर्ट में लपेटकर फेंका, वही बनी अहम सुराग

महिला ने बच्ची को जन्म देने के बाद जिस टी शर्ट में लपेटकर फेंका था, वही इसका अहम सबूत बनी।  दरअसल, टी-शर्ट को पहचानने वाले एक व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि यह कपड़ा उसके घर का है। जिसे उसने होली के समय अपने यहां काम करने वाली महिला को दिया था।

कलयुगी मां तक पहुंची पुलिस

इसी कड़ी से महिला पुलिस और स्वास्थ्य टीम गोपनीय तरीके से उसके घर पहुंची और जांच की। शक गहराने पर महिला को अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने पुष्टि कर दी कि हाल ही में उसकी डिलीवरी हुई है और वह स्तनपान की अवस्था में है।

पति से अलग रहकर मजदूरी करती थी महिला 

बताया जा रहा है कि 30 वर्षीय महिला अपने पति से अलग रहकर पिता के साथ मजदूरी करती थी और आर्थिक रूप से कमजोर है। उसने न तो आंगनबाड़ी को जानकारी दी और न ही किसी अस्पताल में प्रसव कराया।  बरेली SDOP कुंवर सिंह मुकाती ने बताया कि फिलहाल महिला को पुलिस सुरक्षा में सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बच्ची को त्यागने के पीछे की असली वजह उसके बयान के बाद ही सामने आ सकेगी।

क्या है पूरा मामला?

बरेली में शुक्रवार सुबह वार्ड क्रमांक 13 और 14 से कचरा इकट्ठा कर रहे चालक इरशाद खान और हेल्पर रवि डागोर को नर्सिंग टेकरी मंदिर के पास गाड़ी से रोने की आवाज़ सुनाई दी। आवाज सुनते ही उन्होंने आसपास के लोगों को बुलाया। इसी दौरान वार्ड 13 के निवासी नरेंद्र मांझी ने हिम्मत दिखाई और कचरे के ऊपर रखी कपड़े में लिपटी पोटली को खोला। पोटली में एक नवजात बच्ची थी, जिसके शरीर पर कचरा और गोबर चिपका हुआ था।

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