Rajasthan Assembly: राजस्थान विधानसभा के सत्र में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। बुधवार को मीडिया से चर्चा के दौरान जूली ने कहा कि सरकार सदन में गलत आंकड़े पेश कर रही है और सवा दो साल के कार्यकाल में सुधार के बजाय भ्रष्टाचार और विसंगतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष ने जनजातीय विकास विभाग में टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार करने का बड़ा खुलासा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले सवा दो साल से नियमित टेंडर बंद हैं और बजट सीधे हॉस्टल वार्डनों के खातों में डाला जा रहा है। जूली ने कहा कि एक ही वस्तु यानी घी की खरीद में भारी अंतर है कहीं 400 रुपये तो कहीं 800 रुपये प्रति लीटर का भुगतान किया गया, जो आदिवासी बच्चों के अधिकारों पर सीधा प्रहार है।

विश्वविद्यालयों में छात्रों से वसूले जा रहे 1000 रुपये प्रति छात्र विमर्श शुल्क को लेकर भी सदन में हंगामा हुआ। जूली के अनुसार, इस मद में 225 करोड़ रुपये एकत्रित किए गए, लेकिन सरकार यह नहीं बता पाई कि यह विमर्श कहां और कब हुआ। इसके अलावा, जल जीवन मिशन को लेकर उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में एक भी नई स्वीकृति नहीं हुई है और सरकार पुराने कार्यों को ही नया बताकर पेश कर रही है।

सदन में बजट की तुलना बेटा-बेटी से किए जाने वाली टिप्पणी पर टीकाराम जूली ने सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिस सदन में समानता के कानून बनते हैं, वहां ऐसी भेदभावपूर्ण मानसिकता दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस ने पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया था, जबकि वर्तमान सत्ता पक्ष की भाषा अब भी पुरानी सोच को दर्शाती है। टीकाराम जूली ने सदन में स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ कांग्रेस सड़क से सदन तक आंदोलन जारी रखेगी।

पढ़ें ये खबरें