जयपुर। राजस्थान की वित्त मंत्री दीया कुमारी ने बुधवार को विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही उन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान और 2026-27 के बजट अनुमान प्रस्तुत किए। बजट भाषण के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मूल मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश को आर्थिक समृद्धि, सतत और समावेशी विकास की दिशा में आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।
हालांकि, बजट पेश होने के तुरंत बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया। कांग्रेस नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने बजट को निराशाजनक करार देते हुए कहा कि जनता की उम्मीदें एक बार फिर टूट गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में बड़े-बड़े वादे तो किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी योजनाओं का अभाव नजर आता है।
‘अजीब तरह का बजट’
सचिन पायलट ने कहा, “मुझे बड़ा ही अजीब तरह का बजट लगा। सरकार महंगाई कम करने की बात कर रही है, जबकि राजकोषीय घाटा बढ़ रहा है। राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है और 35-40 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लेने की बात सामने आ रही है। यदि वित्तीय प्रबंधन इतना ही मजबूत है तो फिर लगातार ऋण क्यों बढ़ रहा है?”
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर भी तंज कसते हुए कहा कि “डबल इंजन की सरकार” होने के बावजूद प्रदेश की आर्थिक स्थिति चिंताजनक है। पायलट ने कहा कि प्रधानमंत्री खुद को देश का ‘प्रधान सेवक’ बताते हैं, लेकिन प्रदेश में सरकार की कार्यशैली ‘राजा और प्रजा’ जैसी प्रतीत होती है।
किसान, नौजवान और महिलाओं के लिए राहत नहीं
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि बजट में किसानों, युवाओं, महिलाओं और मध्यमवर्ग को कोई ठोस राहत नहीं दी गई है। उन्होंने कहा “लंबा बजट भाषण पढ़ दिया गया, लेकिन इससे आमजन को क्या मिलेगा, यह स्पष्ट नहीं है। जो वर्ग आज सबसे अधिक परेशान हैं, उनके लिए कोई ठोस प्रावधान नजर नहीं आता,”।
पायलट ने यह भी कहा कि न केवल विपक्ष, बल्कि सत्ताधारी दल के कई प्रतिनिधियों की भी अपेक्षाएं रही होंगी, परंतु सरकार ने किसी की आवाज को गंभीरता से नहीं सुना। उनके अनुसार यह बजट महज औपचारिकता निभाने जैसा है।
वित्त मंत्री दीया कुमारी बोलीं – राज्य सरकार प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध
गौरतलब है कि वित्त मंत्री दीया कुमारी ने अपने बजट भाषण में प्रदेश की आर्थिक मजबूती, आधारभूत ढांचे के विकास, रोजगार सृजन और सामाजिक कल्याण योजनाओं को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार समावेशी विकास के मॉडल पर काम कर रही है और प्रदेश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।
बजट को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर सरकार इसे विकासोन्मुखी और दूरदर्शी बता रही है, वहीं विपक्ष इसे जनभावनाओं से दूर और कर्ज पर आधारित बजट करार दे रहा है। आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर और बाहर इस पर तीखी चर्चा जारी रहने की संभावना है।
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