Rajasthan News : जैसलमेर. घर के संस्कारों और पिता के पदचिन्हों पर चलकर एक बेटी पिता की तरह न्यायाधीश बन गई. बचपन से पिता को जज के रूप में देख उन्हीं की तरह न्यायाधीश बनने का सपना जैसलमेर की स्वाती व्यास ने देखा था. घर के अनुशासन, पिता के मार्गदर्शन, परिवार के हौसले और निरंतर मेहनत से स्वाति व्यास ने राजस्थान न्यायिक सेवा में पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया. वर्तमान में वे चाकसू में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर पदस्थ हैं.

बता दें स्वाति व्यास के पिता अशोक कुमार व्यास भी जज रहे हैं. वे जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं. स्वाती ने बचपन से ही घर में न्यायिक माहौल देखा था. उनके घर का माहौल अनुशासन, न्यायिक गरिमाओं और अध्ययन के वातावरण से भरा हुआ था.

पिता को न्याय करता देखा और बचपन से ही न्यायिक कॉलोनी में रहते हुए न्यायिक माहौल को करीब से स्वाति ने देखा था. बचपन से ही स्वाति अपने पिता अशोक व्यास की ही तरह न्यायाधीश बनना चाहती थी. इसके लिए उन्होंने राजस्थान न्यायिक सेवा का मार्ग चुना. राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री स्वाती ने ली. एलएलबी में उन्होंने यूनिवर्सिटी में टॉप किया. इसके बाद न्यायिक सेवा की तैयारी में जुट गई.

निरंतर मेहनत, अनुशासन आत्मविश्वास का परिणाम यह रहा कि राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा में स्वाति ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया. बता दें स्वाति के बड़े भाई अशोक कुमार व्यास भी न्यायाधीश के पद पर कार्यरत है. पिता के अलावा उनसे भी स्वाति को तैयारी में मार्गदर्शन मिला है.

वर्तमान में चाकसू में अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत स्वाति व्यास का मानना है की सफलता किसी एक दिन की उपलब्धि नहीं होती बल्कि या नियंत्रण प्रयास अनुशासन की यात्रा होती है. स्वाति का मानना है कि उनके पिता और उनके भाई ही उनके सबसे बड़े प्रेरणा स्रोत हैं जिन्होंने हर पल उनका मार्गदर्शन किया.