Rajasthan News: राजस्थान में पंचायत चुनावों का बिगुल भले ही अभी न बजा हो, लेकिन आदिवासी बाहुल्य टीएसपी (TSP) क्षेत्र में आरक्षण की चिंगारी ने सियासी गलियारों में तपिश बढ़ा दी है। दरअसल, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जैसे इलाकों में OBC, MBC और EWS वर्ग अब अपनी हिस्सेदारी को लेकर आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इस बार इन वर्गों ने आरक्षण नहीं तो वोट नहीं का नारा बुलंद कर दिया है।

बैंसला की एंट्री से बदली हवा

गौरतलब है कि गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक विजय सिंह बैंसला के हालिया दौरों ने इस आंदोलन को नई संजीवनी दे दी है। बैंसला ने स्थानीय समाज के साथ सीधा संवाद शुरू किया है, जिससे प्रशासन के कान खड़े हो गए हैं। बता दें कि टीएसपी क्षेत्र में वर्तमान में 45% आरक्षण ST और 5% SC वर्ग के लिए है, जबकि बाकी 50% सीटें अनारक्षित रखी गई हैं। अब मांग यह उठ रही है कि इसी 50% हिस्से में से OBC को 10.50%, MBC को 2.50% और EWS को 5% आरक्षण मिलना चाहिए।

गांव-गांव में बैठकों का दौर शुरू

मिली जानकारी के अनुसार, सरदार पटेल सेना के संयोजक सुनील पाटीदार अब इस लड़ाई को गांव-गांव और ढाणी-ढाणी तक ले जाने की तैयारी कर चुके हैं। युवाओं का कहना है कि साल 2013 से उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित रखा गया है। टीएसपी क्षेत्र के युवा अब सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक एकजुट हो रहे हैं, जिसका सीधा असर आगामी पंचायत चुनावों पर पड़ना तय है।

प्रमुख राजनीतिक दलों की चुप्पी के मायने

हैरानी की बात यह है कि कांग्रेस, बीजेपी और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) जैसे बड़े दल फिलहाल इस मुद्दे पर फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि कोई भी दल किसी एक वर्ग को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाना चाहता। हालांकि, स्थानीय प्रतिनिधियों ने दबी जुबान में संकेत दिए हैं कि अगर बिना किसी वर्ग का हक छीने समाधान निकलता है, तो उन्हें आपत्ति नहीं है।

जानकारों की मानें तो टीएसपी बेल्ट में OBC और अन्य वर्गों की लामबंदी से पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लग सकती है। वहीं रोजगार और शिक्षा में समान अवसर न मिलने से युवाओं के बीच सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। ऐसे में यदि समय रहते बात नहीं बनी तो राजस्थान में एक बार फिर बड़ा चक्काजाम और आंदोलन देखने मिल सकता है।

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