Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर विकास प्राधिकरण सहित राज्य के विभिन्न विभागों में कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और प्रभावशाली व्यक्तियों को अवैध लाभ पहुंचाने के आरोपों को लेकर दायर एक याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।

जस्टिस मुननूरी लक्ष्मण की एकलपीठ ने महेश गहलोत की ओर से दायर याचिका में नोटिस जारी किए है। कोर्ट ने सरकार व अन्य प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश देते मामले की अगली सुनवाई 7 मार्च 2026 को तय की है। याचिकाकर्ता महेश गहलोत ने अधिवक्ता अनिता गहलोत के जरिए याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रभावशाली और ब्लू. आईड व्यक्तियों को लाभपहुंचाने के लिए सरकारी कार्य निजी फमों को दिए गए, जिससे राजकोष को भारी नुकसान हुआ।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि 22 अप्रैल 2013 को लोकायुक्त कार्यालय जयपुर को शिकायत प्रस्तुत की गई थी, जिसमें जोधपुर विकास प्राधिकरण में हुए कथित अवैध कार्यों की जानकारी दी गई। शिकायत के बाद कराई गई जांच में यह सामने आया कि कई फाइलें कार्यालय से गायब थीं और कार्यों के भुगतान बिना उचित मूल्यांकन कर दिए गए। जांच रिपोर्ट में 128 फाइलों के गायब होने तथा तीन इंजीनियरों को दोषी पाए जाने का उल्लेख किया गया। जिनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई और सेवा निलंबन की सिफारिश की गई थी। बावजूद याचिकाकर्ता का आरोप है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफअब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

याचिका में यह भी कहा गया कि जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम के तहत कार्रवाई होनी चाहिए थी लेकिन बार. बार आवेदन और पत्राचार के बावजूद सरकार ने न तो कार्रवाई की जानकारी दी और न ही चार्जशीट अथवा प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराई।

सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी भी यह कहते हुए नहीं दी गई कि मामला विधानसभा से संबंधित है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली व्यक्तियों से रिश्तेदारी के कारण दोषी अधिकारियों को संरक्षण दिया जा रहा है।

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