Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने 1985 में पांच साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के प्रयास से जुड़े एक मामले में 1992 से लंबित अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने अभियुक्त शिव प्रकाश को शेष सजा भुगतने के लिए आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। यह फैसला जस्टिस अनूप कुमार ढंड की एकलपीठ ने सुनाया।

घटना का विवरण
यह मामला 7 फरवरी, 1985 का है, जब बारां थाने में पीड़िता के पिता ने शिव प्रकाश के खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास का मामला दर्ज कराया था। घटना के समय अभियुक्त की उम्र 20 साल थी। 18 दिसंबर, 1991 को एडीजे कोर्ट ने उसे पांच साल की सजा सुनाई थी।
अदालत की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह दुष्कर्म के प्रयास का स्पष्ट मामला है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रणव पारीक ने दलील दी कि पीड़िता के अलावा कोई स्वतंत्र गवाह नहीं था और मेडिकल जांच में भी चोट के निशान नहीं मिले। हालांकि, सरकारी अधिवक्ता मानवेन्द्र सिंह ने एफएसएल जांच का हवाला देते हुए दुष्कर्म के प्रयास को साबित किया।
सजा का आदेश
दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता की अपील खारिज कर दी और उसे बची हुई सजा पूरी करने के लिए आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। इस फैसले के तहत अब शिव प्रकाश, जो अब 59 साल का है, को सजा भुगतनी होगी।
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