Rajasthan News: एसीबी मामलों की विशेष अदालत क्रम-1 ने प्रदेश के चर्चित जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में पांच आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। पीठासीन अधिकारी सुरेन्द्र कुमार ने गणपति ट्यूबवेल के प्रोपराइटर महेश कुमार मित्तल, उसके बेटे हेमन्त मित्तल, श्याम ट्यूबवेल के प्रोपराइटर पीयूष जैन, मैनेजर उमेश कुमार शर्मा और पीएचईडी के तत्कालीन लेखाधिकारी गोपाल की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि इन पर गंभीर आरोप हैं और प्रकरण में जांच लंबित है। ऐसे में आरोपियों को जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता।

जमानत अर्जी में कहा गया कि एसीबी ने उन्हें प्रकरण में गलत तरीके से फंसाया है। एसीबी के पास उनके खिलाफ कोई साक्ष्य भी नहीं हैं। इसके अलावा वे लंबे समय से न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे हैं। इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए। इसका विरोध करते हुए विशेष लोक अभियोजक शालिनी गौतम ने अदालत को बताया कि मामले में एसीबी ने इन आरोपियों की मोबाइल बातचीत को रिकॉर्ड किया था। वहीं कोर्ट में चालान पेश होने की जानकारी मिलने पर आरोपी फरार हो गए थे। जल जीवन मिशन में करोडों रुपए के घोटाले को लेकर एसीची ने साल 2023 में मामला दर्ज किया था।

एसीबी जांच में सामने आया कि प्रोजेक्ट को लेकर साल 2021-22 में दो टेंडर निकले थे। जिसमें आरोपियों ने मिलीभगत कर टेंडर हासिल किए थे। काम में अनियमिता और घटिया काम कर मेजरमेंट बुक में गलत जानकारी भरकर राजकोष से करोड़ों रुपए निकाले गए। आरोपियों ने राजकोष से अनियमिता से रकम निकाल कर विभागीय अधिकारियों को रिश्वत देकर अनुचित रूप से निजी फायदा कमाया। एसीबी ने मामले में पूर्व में छह अन्य के खिलाफ जांच कर आरोप पत्र पेश किया था। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने आरोपियों की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।

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