Rajasthan News: जयपुर मेट्रो-प्रथम की एडीजे कोर्ट-3 ने वन्यजीवों के आतंक और वन विभाग की जवाबदेही को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने नवंबर 2022 में शाहपुरा तहसील में बंदरों के हमले के कारण एक व्यक्ति की मौत के मामले में वन विभाग को सीधे तौर पर लापरवाह माना है। न्यायाधीश रामकिशन शर्मा ने राज्य सरकार और वन विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे मृतक के परिजनों को 9.86 लाख रुपये का मुआवजा 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करें।

कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वन विभाग के नियंत्रण वाले काले और लाल मुंह के बंदर यदि वन क्षेत्र से बाहर निकलकर आबादी वाले इलाकों में उत्पात मचाते हैं, तो यह विभाग की विफलता है। अदालत ने माना कि ग्रामीणों को बंदरों के आतंक से सुरक्षित रखना विभाग का वैधानिक दायित्व था, जिसमें वे विफल रहे।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला शाहपुरा के मारखी गांव का है। वादी पक्ष के अधिवक्ता आर.के. वर्मा के अनुसार घटना नवंबर 2022 की सुबह करीब 11 बजे 50 वर्षीय ओंकारमल अपने घर में नीम के पेड़ पर लगी लौकी तोड़ने चढ़े थे। हमला उसी समय लंगूरों और बंदरों का एक झुंड आपस में लड़ते हुए वहां पहुंचा और पेड़ पर चढ़कर ओंकारमल पर हमला कर दिया। हमले के कारण ओंकारमल पेड़ से नीचे गिर गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिवार पर टूटा था दुखों का पहाड़
मृतक ओंकारमल भेड़-बकरी पालन का व्यवसाय करते थे और अपने परिवार के मुख्य आधार थे। उनकी असमय मौत से परिवार को हुए आर्थिक और मानसिक नुकसान को देखते हुए उनकी पत्नी अमरी देवी ने कोर्ट में मुआवजे का दावा पेश किया था। अमरसर पुलिस थाने में भी इस घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
पढ़ें ये खबरें
- दिल्ली पुलिस ने कहा- लापता लड़कियों की खबरें पूर्ण रूप से प्रायोजित, पैसे देकर प्रचारित किया जा रहा ; दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी
- इस तरीके से पकाएंगे राजमा, तो नहीं होगी गैस की प्रॉब्लम …
- DGCA ने बिलासपुर एयरपोर्ट को ऑल वेदर ऑपरेशन की दी स्वीकृति, सीएम साय ने कहा – छत्तीसगढ़ के विकास को मिलेगी नई गति
- CG Crime News : महानदी में मिला अज्ञात अधेड़ का शव, हत्या या आत्महत्या? PM रिपोर्ट से होगा खुलासा
- पीतांबरा पीठ में दलाल साधकों की वजह से बढ़ी पांडा गिरी! मंदिर प्रबंधन-प्रशासन ने लिया बड़ा फैसला, अब खुले में जप नहीं कर पाएंगे साधक


