Rajasthan News: आदिवासी अंचल के ओगणा क्षेत्र से सामने आया एक मामला सामाजिक रिश्तों और पारिवारिक मूल्यों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। यहां एक पिता ने अपनी जिंदा बेटी को सामाजिक रूप से मृत मान न केवल शोक पत्रिका छपवाई, बल्कि कातरिया रस्म और मृत्युभोज भी करवाया।

जानकारी के अनुसार करीब 10 साल पूर्व विवाह के बाद महिला के तीन बच्चे हुए और परिवार सामान्य रूप से चल रहा था लेकिन 23 अक्टूबर 2025 को महिला पति और तीनों बच्चों को छोड़कर गांव के ही एक व्यक्ति के साथ चली गई और उससे दूसरी शादी कर ली। महिला के लापता होने पर परिजनों ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने महिला को तलाश कर परिजनों और बच्चों से मिलवाया, लेकिन महिला ने माता-पिता और बच्चों को पहचानने से साफ इनकार कर दिया। समाज के वरिष्ठ लोगों और पुलिस की ओर से कई दौर की समझाइश के बावजूद महिला अपने निर्णय पर अडिग रही।

बेटी के व्यवहार से आहत पिता ने आखिर कठोर फैसला लेते हुए गम 6 जनवरी को उसे सामाजिक रूप से मृत घोषित कर दिया। गांव और समाज में बकायदा शोक पत्रिका वितरित की गई। 13 जनवरी को कातरिया रस्म के तहत पिता ने मुंडन कराया, जबकि 14 जनवरी को गौरणी-भूप दस्तूर यानी मृत्युभोज हुआ। इसके साथ ही पिता ने बेटी को अपनी संपत्ति की वसीयत से भी बेदखल करने का निर्णय लिया।

पिता ने कहा कि जिस दिन बेटी ने हमें और अपने बच्चों को पहचानने से इनकार किया, उसी दिन वह हमारे लिए मर चुकी है। महिला के भाई ने बताया कि पुलिस के साथ करीब 15 दिन पहले अंतिम बार समझाइश की गई थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। यह कदम इसलिए उठाया गया, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों में बच्चे बेसहारा न हों और समाज में गलत संदेशन जाए। घटना के बाद मृत्युभोज कार्यक्रम में समाज के कई लोग और रिश्तेदार मौजूद रहे। मामला अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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