Rajasthan News: जयपुर जिले की जिला न्यायालय ने एक दिल दहला देने वाली घटना में पांच साल की बच्ची को 11 केवी बिजली के तार से करंट लगने के कारण दोनों हाथ गंवाने पर 99 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने जयपुर डिस्कॉम को मुआवजा राशि के अतिरिक्त मुकदमे में हुए खर्च के तौर पर 2.2 लाख रुपये भी अदा करने का आदेश दिया। यह आदेश पीड़िता पायल के परिवाद पर दिया गया है।

पीठासीन अधिकारी अजीत कुमार हिंगर ने अपने आदेश में कहा कि बेटियां घर की रौनक होती हैं, वे एक रंगीन किरण की तरह पूरे घर को जगमग कर देती हैं। अदालत ने कहा कि परिवाद में मुआवजा राशि के रूप में 50 लाख रुपये और ब्याज की मांग की गई थी, लेकिन मामले की लंबी अवधि को ध्यान में रखते हुए और रुपए के अवमूल्यन को ध्यान में रखते हुए, 99 लाख रुपये का मुआवजा उचित ठहराया गया है। इसके साथ ही अदालत ने मुआवजा राशि पर केस दायर करने की तिथि से छह प्रतिशत ब्याज भी लगाने का आदेश दिया।
अधिवक्ता बसंत सैनी ने अदालत में बताया कि अलवर जिले के मुंडावर निवासी पांच साल की पायल 27 मार्च 2015 को अपने घर के पिछवाड़े खेल रही थी, तभी 11 केवी बिजली का तार टूटकर उस पर गिर गया। इस दुर्घटना में पायल बुरी तरह झुलस गई और इलाज के दौरान एक हाथ को कंधे से और दूसरा हाथ को कोहनी से नीचे काटना पड़ा। इसके साथ ही पूरे शरीर में कई घाव हो गए थे। पायल के परिवार ने आरोप लगाया कि बिजली के पुराने तारों को ठीक से नहीं बदला गया था और उनकी सही देखरेख नहीं की जा रही थी, जिससे यह दुर्घटना घटी। इसीलिए उन्होंने घातक दुर्घटना अधिनियम, 1855 के तहत मुआवजे की मांग की।
इस मामले में जयपुर डिस्कॉम के वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि घटना के दिन आंधी के कारण पोल पर लगे डिस्क इंसुलेटर से तार खंभे से गिर गए थे। तार जमीन से स्पर्श नहीं कर रहे थे, जिससे अर्थिंग नहीं बनी और ब्रेकर ट्रिप नहीं हुआ। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि बच्ची खेलते वक्त तारों को हाथों से उठाने की कोशिश कर रही थी, जिससे यह दुर्घटना हुई। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना में किसी की मौत नहीं हुई, इसलिए घातक दुर्घटना अधिनियम के तहत केस नहीं चल सकता।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जयपुर डिस्कॉम को दोषी ठहराया और पीड़िता को 99 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। इस फैसले से पीड़िता और उसके परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद है, साथ ही यह भविष्य में इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक अहम कदम साबित हो सकता है।
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