Rajasthan News: राजस्थान में इन दिनों जारी गैस किल्लत ने जैसलमेर के विश्व प्रसिद्ध पर्यटन उद्योग की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि रिसॉर्ट्स में 45 फीसदी बुकिंग होने के बावजूद संचालकों के सामने सबसे बड़ा संकट अपनी रसोई चलाने का है। अगर गैस की सप्लाई जल्द सुचारू नहीं हुई, तो कारोबारियों को रिसॉर्ट्स बंद करने पर मजबूर होना पड़ेगा और ऐसी स्थिति बनी तो फिर इन्हें दोबारा शुरू करने की स्थिति सीधे सितंबर महीने में ही बन पाएगी।

रिसोर्ट एंड वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारी उपेन्द्र सिंह राठौड़ ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि पर्यटकों की आवाजाही तो बनी हुई है, लेकिन जब रसोई में आग ही नहीं जलेगी तो उन्हें लंच और डिनर उपलब्ध कराना असंभव है। इस संकट से पर्यटन उद्योग को करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को एक हाई-लेवल बैठक बुलाई थी। बैठक में उन्होंने गड़बड़ी करने वाली एजेंसियों और मुनाफाखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सप्लाई को हर हाल में सामान्य बनाने के लिए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के कर्मचारियों की छुट्टियां तक रद्द कर दी गई हैं, ताकि आम जनता और उद्योग जगत को राहत मिल सके।
इसके बावजूद धरातल पर चुनौतियां कम नहीं हो रही हैं। जैसलमेर ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी हुई हैं और आम जनता के साथ-साथ होटल-रेस्टोरेंट मालिक परेशान हैं। जैसलमेर जैसे शहर के लिए पर्यटन ही मुख्य आधार है। यदि रिसॉर्ट्स को गैस के अभाव में अपनी सेवाएं बंद करनी पड़ीं, तो इसका सीधा असर होटल के कर्मचारियों, गाइडों और स्थानीय दुकानदारों की आजीविका पर पड़ेगा। सरकार का सख्त रुख अपनी जगह है, लेकिन सवाल यही बना हुआ है कि कब तक रसोई का धुआं वापस उठेगा और कब तक यह पर्यटन का संकट छंटेगा।
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