नागौर। नागौर सांसद और आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने जिला प्रशासन से सहमति बनने के बाद जयपुर कूच का फैसला वापस ले लिया है. इसके साथ ही रियांबड़ी और मेड़ता क्षेत्र की विभिन्न मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है. बुधवार सुबह हुई बातचीत में प्रशासन और सांसद बेनीवाल के बीच सहमति बनने के बाद यह निर्णय लिया गया.

मंगलवार शाम हजारों किसानों और समर्थकों के साथ हनुमान बेनीवाल का काफिला जयपुर की ओर रवाना हुआ था. प्रशासन के आग्रह पर काफिला देर रात नागौर-अजमेर जिले की सीमा पर स्थित बाढी घाटी में रोक दिया गया. रात करीब 11:30 बजे अजमेर रेंज के आईजी राजेंद्र सिंह, नागौर जिला कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित और एसपी मृदुल कच्छावा मौके पर पहुंचे और प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की, लेकिन उस समय कुछ बिंदुओं पर सहमति नहीं बन पाई.

इसके बाद बुधवार तड़के करीब 5 बजे एक बार फिर वार्ता का दौर चला, जो सफल रहा. वार्ता के बाद हनुमान बेनीवाल ने सरकार की ओर से सभी मांगें मान लिए जाने की घोषणा की और जयपुर कूच व आंदोलन समाप्त करने का एलान किया.

छह प्रमुख मांगों पर लिखित सहमति

सांसद हनुमान बेनीवाल ने बताया कि प्रशासन ने उनकी छह प्रमुख मांगों पर लिखित सहमति दी है. बजरी माफिया के खिलाफ कार्रवाई के लिए एक दिन के भीतर सर्वे शुरू किया जाएगा और अगले दो-तीन दिनों में सभी प्रक्रियाएं पूरी करने का आश्वासन दिया गया है. इसके अलावा किसानों को मुआवजा सहित अन्य लंबित मांगों पर भी शीघ्र कार्रवाई की बात कही गई है.

ये प्रमुख मांगें रहीं शामिल

वार्ता के दौरान बजरी माफियाओं के खिलाफ ड्रोन सर्वे और मैनुअल जांच कर सख्त कार्रवाई करने तथा भारी जुर्माना लगाने की मांग रखी गई. साथ ही डेगाना एसडीएम, डेगाना डीएसपी और माइनिंग इंजीनियर राकेश शेषमा समेत नागौर के कुछ अधिकारियों को पद से हटाने और निलंबित करने की मांग भी उठाई गई.
इसके अलावा मेड़ता और रियां क्षेत्र के उन गांवों को आपदा राहत में शामिल करने की मांग की गई, जिन्हें पिछले वर्ष का मुआवजा अब तक नहीं मिला है. एसडीएम द्वारा कथित रूप से गलत तरीके से आवंटित 14 हजार बीघा गोचर भूमि के मामले में सख्त कार्रवाई की मांग पर भी प्रशासन ने लिखित सहमति दी है.

कैसे बढ़ा था आंदोलन

किसानों की मांगों पर प्रशासन की कथित टालमटोल से आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया था. प्रशासन की ओर से मांगी गई दो दिन की मोहलत पूरी होने के बाद मंगलवार को रियांबड़ी में बड़ी संख्या में किसान एकत्र हुए. धरना स्थल पर पहुंचे सांसद हनुमान बेनीवाल ने प्रशासन पर केवल कागजी कार्रवाई का आरोप लगाते हुए किसानों को धरातल पर राहत नहीं मिलने की बात कही थी.

प्रशासनिक रवैये से नाराज होकर बेनीवाल ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया और किसानों के साथ पादु कलां थाने के सामने हाईवे की ओर कूच कर दिया. इसके बाद अजमेर संभागीय आयुक्त कार्यालय जाने और फिर जयपुर कूच का निर्णय लिया गया. करीब 2000 वाहनों के काफिले के साथ जयपुर रवाना हुए आंदोलनकारियों ने अंततः प्रशासन से सहमति बनने के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया.

Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H