Rajasthan News: नागौर जिले की राजनीति में प्रभावशाली माने जाने वाले मिर्धा परिवार का आपसी विवाद अब थाने तक पहुंच गया है। जोधपुर स्थित मिर्धा फार्म की करीब 150 गज जमीन को लेकर पूर्व सांसद डॉ. ज्योति मिर्धा और उनके चचेरे भाई मनीष मिर्धा आमने-सामने आ गए हैं। इस मामले में डॉ. ज्योति मिर्धा की ओर से प्रतापनगर थाने में मनीष मिर्धा और अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।

डॉ. ज्योति मिर्धा की तरफ से उनके अधिकृत प्रतिनिधि प्रेमप्रकाश ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। शिकायत में सूथला स्थित फार्म हाउस पर जबरन घुसपैठ, कब्जे की कोशिश और तोड़फोड़ के आरोप लगाए गए हैं।
दूसरी ओर मनीष मिर्धा पक्ष का कहना है कि विवाद केवल जमीन का नहीं, बल्कि वहां बने पैतृक समाधि स्थल को लेकर है। उनका दावा है कि वे अपने पूर्वजों की समाधियों की रक्षा कर रहे हैं। वहीं ज्योति मिर्धा का पक्ष इसे अवैध अतिक्रमण और जबरन कब्जा करार दे रहा है। हालात को देखते हुए पुलिस ने समाधि स्थल पर सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी तैनात कर दिया है।
एफआईआर में दर्ज आरोप
एफआईआर के अनुसार घटना 13 जनवरी को दोपहर करीब 12 बजे की है, जब मनीष मिर्धा अपने 10–12 साथियों के साथ कथित तौर पर फार्म हाउस में जबरन घुस आए। आरोप है कि उन्होंने मौके पर मौजूद केयरटेकर सलीम को धमकाकर ताले की चाबियां छीन लीं।
इसके अगले दिन 14 जनवरी को दोबारा ताले तोड़कर समाधि स्थल के साथ छेड़छाड़ और तोड़फोड़ की गई। परिवादी प्रेमप्रकाश का दावा है कि इस पूरी घटना के वीडियो फुटेज मौजूद हैं, जिनमें आरोपी पक्ष साफ तौर पर तोड़फोड़ करता नजर आ रहा है।
मनीष मिर्धा के खिलाफ केस दर्ज
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रतापनगर पुलिस ने प्रेमप्रकाश की रिपोर्ट के आधार पर भारतीय न्याय संहिता के तहत मनीष मिर्धा के खिलाफ अनधिकृत प्रवेश, जबरन घर में घुसने, हमला करने की तैयारी और गैरकानूनी जमावड़े जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने घटनास्थल से जुड़े वीडियो फुटेज को साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित कर लिया है। मामले की जांच थानाधिकारी भवानी सिंह कर रहे हैं।
समाधि स्थल बना विवाद की जड़
पूरे विवाद की जड़ फार्म हाउस परिसर में बना करीब 150 वर्ग गज का समाधि स्थल बताया जा रहा है। मनीष मिर्धा पक्ष का आरोप है कि डॉ. ज्योति मिर्धा इस जमीन को बेचना चाहती हैं और समाधि स्थल सौदे में बाधा बन रहा है। उनका कहना है कि समाधि हटाने का दबाव बनाया जा रहा है, जबकि वे अपने पूर्वजों की निशानी को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि सबसे पहले वर्ष 1982 में नाथूराम मिर्धा की मां की समाधि यहां बनाई गई थी। इसके बाद 1987 में मनीष के बड़े भाई रवि की और 1996 में नाथूराम मिर्धा की समाधि इसी स्थल पर बनी। अब मनीष अपने पिता भानु प्रकाश मिर्धा की समाधि यहीं बनाने की बात कह रहे हैं, जिसका विरोध किया जा रहा है। आरोप है कि जमीन हड़पने की नीयत से यह पूरी कार्रवाई की गई।
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