Rajasthan News: शिक्षा विभाग की एक बड़ी चूक के कारण प्रदेश के हजारों नन्हे विद्यार्थी शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्रवेश पाने से वंचित हो रहे हैं। विभाग की उच्च स्तरीय बैठक में लिए गए निर्णय के बावजूद, निदेशालय ने आरटीई गाइडलाइन में आयु सीमा में छूट का प्रावधान नहीं जोड़ा, जिसका खामियाजा करीब 50 हजार बच्चों को भुगतना पड़ सकता है।

गत 1 दिसंबर को शिक्षा सचिव, राज्य परियोजना निदेशक और बीकानेर स्थित शिक्षा निदेशालय के अधिकारियों की मौजूदगी में एक तैयारी बैठक हुई थी। इस बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि पहली कक्षा में प्रवेश के लिए आयु सीमा में 4 महीने की शिथिलता (छूट) दी जाएगी और 31 जुलाई तक की आयु को आधार माना जाएगा। निर्णय का उल्लेख बैठक के कार्यवाही विवरण में भी दर्ज है, लेकिन जब निदेशालय ने गाइडलाइन जारी की, तो यह महत्वपूर्ण बिंदु नदारद था।
क्या है आयु सीमा का पेंच?
विभाग ने 31 मार्च 2026 को आधार मानकर आयु की गणना की है, जिसके अनुसार केवल 6 से 7 वर्ष के बच्चे (जन्म तिथि 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 के मध्य) ही आवेदन के पात्र हैं। बैठक के निर्णय अनुसार, यदि 31 जुलाई तक छूट मिलती, तो और भी कई बच्चे पात्र हो जाते।
आंकड़ों में समझें नुकसान
पिछले साल (2025) में तब आयु की गणना 31 जुलाई तक की गई थी, जिसके चलते पहली कक्षा के लिए 1.75 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे। इस साल (2026) में आयु सीमा में छूट न मिलने के कारण अब तक केवल 1.25 लाख आवेदन ही आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छूट दी जाती, तो 50 हजार और विद्यार्थी आवेदन कर पाते, जो अब इस सुविधा से बाहर हो गए हैं।
आज आवेदन का अंतिम दिन, 12 मार्च को लॉटरी
आरटीई के तहत ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 20 फरवरी से शुरू हुई थी और आज, 10 मार्च, आवेदन की अंतिम तिथि है। सोमवार शाम तक कुल 5.77 लाख आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। प्रवेश के लिए वरीयता सूची यानी लॉटरी 12 मार्च को निकाली जाएगी।
अभिभावक संघ ने उठाए सवाल
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन ने इस मामले पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि बैठक में स्पष्ट निर्णय हुआ था कि 31 जुलाई 2026 तक आयु सीमा में छूट दी जाएगी, लेकिन निदेशालय ने आदेश में इसे लागू नहीं किया। विभागीय अधिकारी अब इस गंभीर विषय पर चुप्पी साधे हुए हैं।
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