Rajasthan News: क्रिकेट और बैडमिंटन किट घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि बहरोड़ विधानसभा के पूर्व विधायक बलजीत यादव ने विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MLA-LAD) के करीब 2.87 करोड़ रुपये की हेराफेरी की। यह राशि रिश्तेदारों और सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर की गई और इसका एक हिस्सा प्रॉपर्टी खरीदने में भी इस्तेमाल हुआ।

ED ने मंगलवार रात अलवर के शाहजहांपुर टोल प्लाजा के पास से बलजीत यादव को हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें जयपुर स्थित ED कार्यालय लाया गया, जहां पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। कोर्ट से उन्हें PMLA के तहत तीन दिन की रिमांड पर भेजा गया है।
मामला साल 2021-22 का है, जब बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र के 32 सरकारी स्कूलों के लिए क्रिकेट और बैडमिंटन किट खरीदी गई थीं। इन खरीदों के नाम पर MLA-LAD फंड से 3.72 करोड़ रुपये खर्च दिखाए गए। ED की जांच में आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं। दिसंबर 2024 में इस मामले में PMLA के तहत FIR दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।
ED अधिकारियों के मुताबिक, 24 जनवरी 2025 को जयपुर, दौसा और हरियाणा के रेवाड़ी में कुल 9 ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया। ये ठिकाने पूर्व विधायक, उनके रिश्तेदारों और उनसे जुड़ी कंपनियों से संबंधित थे। तलाशी के दौरान 31 लाख रुपये नकद, फर्जी दस्तावेज, रिकॉर्ड और कई डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए, जिनसे फंड लॉन्ड्रिंग के अहम सबूत मिले।
जांच में यह भी सामने आया कि बलजीत यादव के विधायक कार्यकाल (2018 से 2023) के दौरान वे इस पूरे घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता थे। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के स्कूलों के लिए खेल सामग्री की खरीद की सिफारिश की और अपने सहयोगियों के साथ मिलकर मेसर्स बालाजी कम्प्लीट सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड सहित कई कंपनियों को शामिल कराया।
ED का दावा है कि मेसर्स सूर्या एंटरप्राइजेज, राजपूत स्पोर्ट्स एंटरप्राइजेज और शर्मा स्पोर्ट्स एंटरप्राइजेज जैसी कंपनियां कर्मचारियों और सहयोगियों की पहचान का इस्तेमाल कर बनाई गई थीं। इन कंपनियों को खेल सामग्री की ट्रेडिंग का कोई पूर्व अनुभव नहीं था। इसके बावजूद नियमों को दरकिनार कर इन्हें टेंडर दिए गए, ताकि प्रतिस्पर्धा रोकी जा सके।
जांच में यह भी सामने आया कि घटिया गुणवत्ता की खेल सामग्री नकद में खरीदी गई और नीमराना पंचायत समिति को बढ़ा-चढ़ाकर बिल भेजे गए, जिन्हें मंजूरी मिल गई। बैंक खातों के विश्लेषण से पता चला कि फंड को रिश्तेदारों और सहयोगियों के खातों में डायवर्ट किया गया। इस पैसे से प्रॉपर्टी खरीदी गई, जिसे बाद में बेचकर राशि कंपनियों को लौटाई गई और अधिकांश रकम नकद में निकाल ली गई। ED का कहना है कि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।
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