Rajasthan News: राजधानी में एक महिला ने तत्कालीन एडिशनल डीसीपी रामसिंह शेखावत के खिलाफ पुलिस कमिश्नर को शिकायत की। पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने की बजाय मामले को परिवाद में दर्ज किया।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि एफआईआर दर्ज न करना भारतीय दंड सहिता की धारा 166ए का उल्लंघन है। शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 में चौमूं थाने में संगठित अपराधियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। तब तत्कालीन अनुसंधान अधिकारी रामसिंह शेखावत ने अशोभनीय व्यवहार किया और अनैतिक मांग की। विरोध करने पर पीड़िता के भाई को उसी के दर्ज करवाए मामले में गिरफ्तार कर लिया। महिला की शिकायत पर पुलिस रिपोर्ट को दबाकर बैठ गई।
बयानों के लिए महिला को ही बुलाया
आरोप है कि पुलिस ने महिला की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की और उसे ही बयानों के लिए बुलाकर परेशान करने लगे। आखिरकार पुलिस मामले में एफआइआर क्यों दर्ज नहीं कर रही है। उसके मामले में अभी तक क्या कार्रवाई की इसकी भी जानकारी नहीं दी गई।
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