Rajasthan News: इतिहास, संगीत और लोकसंस्कृति के रंगों से सजा कुंभलगढ़ महोत्सव एक दिसबर से शुरू हो रहा है। कुंभलगढ़ किले की भव्यता के बीच तीन दिनों तक कला और परंपरा का ऐसा संगम देखने को मिलेगा जो सैलानियों के लिए अविस्मरणीय होगा। इस बार महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होगा नगाड़ा संगीत, जिसकी गूंज शाम ढलते ही किले की घाटियों को सराबोर कर देगी।

पहला दिन : एकम – मैत्रेयी पहाड़ी का जीवंत नृत्य कोलाज
महोत्सव की भव्य शुरुआत मशहूर नृत्यांगना मैत्रेयी पहाड़ी की प्रस्तुति एकम से होगी। वे कथक, मणिपुरी, लोकनृत्य और समकालीन शैलियों का सुंदर मिश्रण पेश करेंगी। उनका यह नृत्य-कोलाज कला, लय और अभिव्यक्ति का ऐसा मेल होगा।
दूसरा दिन : लोकराग-संदीप रत्नू का नाट्य-संगीत
दूसरे दिन मंच पर होगा लोकराग का अनुपम प्रवाह। संदीप रत्नू और उनकी टीम लोक संगीत, नाट्य शैली और पारंपरिक धुनों को एक सूत्र में पिरोकर प्रस्तुति देंगे। करीब दो दर्जन कलाकारों का यह सामूहिक प्रदर्शन राजस्थान की लोकपरंपराओं की जीवंत झलक पेश करेगा।
अंतिम दिन : नगाड़ा संगीत की धमक
तीसरे दिन महोत्सव चरम पर होगा जब राजस्थान की मिट्टी से जुड़ा नगाड़ा संगीत पूरे वातावरण को ऊर्जा से भरेगा। ढोल-नगाड़ों की गूंज, कलाकारों की तालबद्ध लय और किले की प्रतिध्वनि रोमांच भरेगी। महोत्सव में पगड़ी बांधना, रस्साकशी, लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां और रंगारंग झांकी भी देखने को मिलेगी।
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