Rajasthan News: झुंझुनू के बीडीके अस्पताल में एक जीवित व्यक्ति को मृत घोषित करने के गंभीर मामले में तीन डॉक्टरों पर कार्रवाई की गई है। राज्य सरकार ने बड़ी लापरवाही का संज्ञान लेते हुए पीएमओ और दो अन्य चिकित्सा अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
निलंबित डॉक्टरों में प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. संदीप कुमार पंचार, मेडिसिन विभाग के डॉ. योगेश कुमार जाखड़, और चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवनीत मील शामिल हैं। निलंबन के बाद डॉ. पंचार का मुख्यालय जैसलमेर, डॉ. जाखड़ का बाड़मेर और डॉ. मील का जालोर स्थानांतरित किया गया है।

सरकार का आदेश
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त सचिव निशा मीणा ने आदेश जारी करते हुए बताया कि बीडीके अस्पताल की इमरजेंसी यूनिट में लापरवाही बरतते हुए जीवित व्यक्ति को मृत घोषित किया गया। यह कार्रवाई जिला कलेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। तीनों डॉक्टरों को राजस्थान सिविल सेवा नियम-1958 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
घटना झुंझुनू के बागड़ कस्बे की है, जहां मां सेवा संस्थान नामक संस्था लावारिस, दिव्यांग और मानसिक रूप से कमजोर लोगों की सेवा करती है। गुरुवार सुबह बेहोशी की हालत में रोहिताश नामक व्यक्ति को बीडीके अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में भेज दिया।
शव को दो घंटे डीप फ्रीजर में रखने के बाद अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू की गई। जब शव को चिता पर रखा गया और आग देने की प्रक्रिया शुरू हुई, तभी शरीर में हरकत हुई। यह देखकर मौजूद लोग हैरान रह गए। आनन-फानन में रोहिताश को वापस बीडीके अस्पताल लाया गया, जहां उसे आईसीयू में भर्ती किया गया।
मामले में सख्ती
इस गंभीर लापरवाही के सामने आने पर सरकार ने त्वरित कार्रवाई की। जांच पूरी होने तक तीनों डॉक्टर निलंबित रहेंगे। यह घटना चिकित्सा क्षेत्र में लापरवाही का एक बड़ा उदाहरण बन गई है।
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