Rajasthan News: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नीति आयोग की शासी परिषद की 10वीं बैठक में हिस्सा लिया, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। इस अवसर पर उन्होंने राजस्थान को विकसित राज्य बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को साझा किया और केंद्र सरकार से जल और ऊर्जा क्षेत्रों में विशेष सहयोग की मांग की।
राइजिंग राजस्थान से निवेश का नया अध्याय
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन किया गया, जिसमें 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले। इनमें से 3.25 लाख करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है।

राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए ‘एक जिला, एक उत्पाद’, एमएसएमई नीति 2024, निर्यात प्रोत्साहन नीति, टेक्सटाइल व लॉजिस्टिक नीति और डाटा सेंटर नीति जैसी कई नीतियां लागू की हैं। जल्दी ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस आधारित इंडस्ट्रियल और ट्रेड प्रमोशन नीति भी लाई जाएगी।
राजस्थान में 15 नए औद्योगिक क्षेत्रों के लिए 2,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू हुईं हैं और 20 नए औद्योगिक क्षेत्र भूमि आवंटन के लिए खोले गए हैं।
पर्यटन और युवा विकास को मिली प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की समृद्ध संस्कृति पर्यटन उद्योग की रीढ़ है। इसके लिए एक नई पर्यटन नीति जल्द घोषित की जाएगी। युवाओं को उद्यमशीलता के लिए अटल एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम शुरू किया गया है। अब तक 67,000 से अधिक युवाओं को नौकरियां दी जा चुकी हैं, जबकि 1.87 लाख पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है।
अक्षय ऊर्जा में राजस्थान की अग्रणी भूमिका
राजस्थान ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। अब तक 10,000 मेगावाट की वृद्धि हो चुकी है और राज्य देश में सौर व अक्षय ऊर्जा में पहले स्थान पर है। पीएम-कुसुम योजना और सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के क्रियान्वयन में भी राज्य अग्रणी बना हुआ है।
सर्कुलर इकोनॉमी और नई वाहन नीति
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2025 में एक नई योजना लाई जाएगी जिससे री-सायक्लिंग व पुन: उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। इसके तहत 2 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी।
व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी के तहत पुराने वाहनों को हटाने और प्रदूषण-मुक्त वाहनों को बढ़ावा देने की योजना भी लागू की जा रही है।
केंद्र से रखीं विशेष मांगें
मुख्यमंत्री शर्मा ने पोंग डैम की जल भराव क्षमता बढ़ाने, फिरोजपुर फीडर की लाइनिंग, थर्मल परियोजनाओं में राहत, और कोयले की आपूर्ति जैसी महत्वपूर्ण मांगें केंद्र सरकार के समक्ष रखीं। साथ ही, पीएम-कुसुम योजना के तहत 5,000 मेगावाट अतिरिक्त अक्षय ऊर्जा और बैटरी स्टोरेज क्षमता की भी मांग की गई।
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