Rajasthan News: हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि प्रदेश में साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए पूर्व में बताए उपायों के लिए अब तक क्या कार्रवाई की है। यह भी बताएं कि बाकी काम को कब तक पूरा कर लेंगे। जस्टिस रवि चिरानिया ने यह निर्देश साइबर अपराध से जुड़े मामले में दायर जमानत याचिकाओं पर दिया।

अदालती आदेश की पालना में एसीएस गृह भास्कर ए. सावंत, डीजी कानून व्यवस्था संजय अग्रवाल, एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह सहित विधि सचिव हाजिर हुए। अदालत ने कहा कि वे उनके प्रयासों की सराहना करती है, लेकिन पुलिस कमिश्नर को बुलाने के बाद भी अब तक ऐसे मामलों में कुछ नहीं किया। अभी तक साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर नहीं बना है। जवाब में एसीएस भास्कर सावंत ने कहा कि इसके लिए करीब 10000 वर्गफीट जगह चाहिए। मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में भी है। उन्होंने भी सेंटर बनाने का आश्वासन दिया है।

अदालत ने कहा कि कोई समस्या हो तो बताओ, हम न्यायिक आदेश दे देते हैं.. आप बिल्डिंग चिन्हित करो, आदेश हम कर देते हैं। वहीं एफएसएल विंग में कर्मचारियों की कमी को लेकर वीके सिंह ने कहा कि आरपीएससी की परीक्षा में योग्य अभ्यर्थी नहीं मिले। इस पर अदालत ने कहा कि सालों से जो संविदा पर काम कर रहे हैं, उनकी सेवाएं ली जा सकती हैं।

जिला मुख्यालय पर साइबर अपराध विशेषज्ञ सरकारी वकील की नियुक्ति पर एसीएस ने कहा कि हर जिला मुख्यालय पर एक और हाईकोर्ट की दोनों पीठ में एक-एक विशेषज्ञ सरकारी वकील नियुक्त करने का निर्णय लिया है। पन्द्रह दिन में सभी नियुक्तियां हो जाएगी। डिजिटल उपकरणों की खरीद मामले में राज्य सरकार ने कहा कि ज्यादातर केस सिम कार्ड व बैंक खातों से जुड़े हैं। लोग अपने सिम कार्ड और बैंक खाते इन्हें बेच देते हैं। इन्हें चिन्हित कर ब्लॉक करने का काम भी चल रहा है। जिस पर अदालत ने कहा कि गिग वर्कर्स के तौर पर घरों में कौन घुस रहा है, किसी को पता नहीं है। पंजीकृत एक व्यक्ति है, लेकिन आता दूसरा है।

पढ़ें ये खबरें