Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कहा है कि वह कैदियों की शिकायतों के एक शिकायत निवारण कमेटी का गठन करे। जिसमें सभी जिलों के मजिस्ट्रेट, जिला न्यायाधीश, सीजेएम, सामाजिक कल्याण अधिकारी, जेल अधीक्षक और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव शामिल हो।

अदालत ने कहा कि इस समिति के गठन की सूचना हर जेल के नोटिस बोर्ड पर लगाई जाए, ताकि कैदी अपनी शिकायत उन तक पहुंचा सके। अदालत ने कहा कि मामले में उचित आदेश जारी करने से पूर्व राज्य सरकार को अंतरिम आदेश दिए जाते हैं कि वह कैदियों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की नीति लेकर आए। जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने यह आदेश पीपुल्स वॉच राजस्थान की याचिका पर दिए। वहीं अदालत ने मामले में गृहमंत्रालय को भी पक्षकार बनाने को कहा है।

जेलों का करें औचक निरीक्षण

अदालत ने प्रदेश के सभी सत्र न्यायाधीश, सीजेएम और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिवों को निर्देश दिए हैं कि चे तीन सप्ताह के भीतर जेलों का औचक निरीक्षण कर कैदियों से उनकी समस्याओं को जाने और उसकी रिपोर्ट अदालत में पेश करें। अदालत ने कहा कि कैदियों की व्यावहारिक कठिनाइयों पर कोई ध्यान नहीं देता। उनकी आवाज अनसुनी रह जाती है। साल 2022 में नियमों में संशोधन करने के बावजूद जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग हैं। कैदियों को आज भी पीने और कपड़े धोने के लिए पर्याप्त पानी सहित अन्य सुविधा नहीं मिल रही हैं।

यह है याचिका

याचिका में कहा गया कि राजस्थान जेल नियम, 1951 के नियम 114 के अनुसार कैदी साप्ताह में एक बार अपने कपड़े धोएंगे और जेल अधिकारी कैदियों को साबुन आदि मुहैया कराएंगे। नियम 120 के तहत पुरुष कैदी को प्रति सप्ताह तीन चौथाई औस और महिला कैदियों को डेढ़ औंस धोने का सोद्ध प्रदान किया जाएगा। याचिका में कहा गया कि कपड़े धोने की यह मात्रा काफी कम है। इससे उचित धुलाई और व्यक्तिगत स्वच्छता नहीं रह सकती। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता सुमन शेखावत ने कहा कि जेल नियमों के तहत हर कैदी को तय मात्रा में सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में अदालत को इसमें हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने अंतरिम आदेश जारी किए हैं।

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