Rajasthan News: राजस्थान हाईकोर्ट ने थाना बदनोर, जिला ब्यावर में दर्ज सामूहिक मारपीट के एक मामले में चार अभियुक्तों को जमानत प्रदान करते तत्कालीन सेशन न्यायाधीश दिनेश कुमार गुप्ता की ओर से पारित कुछ निदेशों पर गंभीर टिप्पणी की है। जस्टिस सुदेश बंसल ने स्पष्ट किया कि जमानत याचिका का निस्तारण करते समय न्यायालय अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अन्य प्रशासनिक या नीतिगत निर्देश जारी नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देख रजिस्ट्रार (न्यायिक) को निर्देश दिया कि तत्कालीन सेशन न्यायाधीश, ब्यावर की ओर से पारित आदेश दिनांक 25.11.2025 की प्रति कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश, राजस्थान हाईकोर्ट के अवलोकन के लिए प्रस्तुत की जाए।
यह आदेश एक जमानत याचिका में पारित किया गया, जो एफआईआर 146/2025, थाना बदनोर, जिला ब्यावर से सम्बन्धित है। अभियुक्तों पर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराएं 115(2), 126(2), 189(2), 303(2) एवं 333 के तहत आरोप लगाए गए थे।
उल्लेखनीय है कि सेशन न्यायाधीश, ब्यावर ने 25 नवम्बर के आदेश में जमानत याचिका का निस्तारण कर मामले का अनुसंधान सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से करवाए जाने के सम्बन्ध में निर्णय लेने और अवैध खनन रोकने जैसे निर्देश भी जारी किए थे।
इस पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे निर्देश धारा 483 बीएनएसएस के अंतर्गत जमानत याचिका के दायरे से बाहर हैं और इस प्रकार के आदेश पारित करना अधिकार क्षेत्र से परे है।
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