Rajasthan News: शहर में एक ऐसा मंदिर है, जो विशेष रूप से प्रेमी-प्रेमिकाओं के लिए प्रसिद्ध है। यह गुरु गणपति मंदिर है, जिसे लोग प्यार और मिलन की कामनाओं के लिए इश्किया गणेश के नाम से जानते हैं। मान्यता है कि मंदिर में 21 फेरी लगाने से प्रेमी और प्रेमिका अपने जीवनसाथी के साथ जुड़ जाते हैं। यह परंपरा दशकों से चली आ रही है।

मंदिर के पास रहने वाले राधेश्याम और विजयलक्ष्मी की जोड़ी इसका जीवंत उदाहरण हैं। 40 साल पहले वे इसी मंदिर में मनोकामना लेकर आए थे और फेरी लगाने के बाद उनकी शादी हुई। राधेश्याम बताते हैं, पहले हम शहर के अंदर रहते थे। विजयलक्ष्मी से मिलने मंदिर के पास आते थे। फेरी लगाने के बाद ही हमारी शादी हुई। आज भी लोग हमारी तरह मनोकामना लेकर मंदिर आते हैं।
मंदिर के पुजारी उमेश पुरोहित ने बताया कि मोबाइल और इंटरनेट के समय में भी युवा जोड़े यहां मिलने आते थे। उनकी सगाई और शादी के बाद मंदिर को लोग प्यार और मिलन की जगह मानने लगे। यही कारण है कि इसे इश्किया गणेश के नाम से जाना जाता है, जबकि असली नाम गुरु गणपति मंदिर है।
100 साल पुराना मंदिर
मंदिर की स्थापना लगभग 100 साल पहले हुई थी। मंदिर में लोगों की गहरी आस्था है और नियमित दर्शनार्थी यहां आते हैं। प्रेमी-प्रेमिकाओं के साथ-साथ श्रद्धालु भी बुधवार को विशेष रूप से दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर से जुड़े गगन सोनी ने बताया कि दूर-दराज से भी लोग अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए यहां आते हैं।
ओडिशा से आई चिट्ठी
इश्किया गणेश की लोकप्रियता पूरे भारत में है। कुछ समय पहले ओडिशा की एक युवती ने भगवान के नाम पत्र भेजा, जिसमें उसने अपनी पसंद के युवक से शादी की कामना की। उसकी मनोकामना पूरी हुई और बाद में उसने शादी का कार्ड और टिकट मंदिर को भेजा। सोनी ने कहा, “सच्चे मन से की गई कामना भगवान पूरी करते हैं।”
ये है इतिहास
माना जाता है कि यह मूर्ति जोधपुर के महाराजा मानसिंह के काल में गुरों के तालाब की खुदाई के दौरान मिली थी। इसे बाद में जूनी मंडी की गली में विक्रम संवत 1969 में स्थापित किया गया। इस हिसाब से मंदिर 100 वर्ष से अधिक पुराना है।
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