बूंदी। राजस्थान के बूंदी जिले में पुलिस हिरासत में एक युवक की संदिग्ध मौत के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पॉक्सो मामले में हिरासत में लिए गए 23 वर्षीय युवक की मौत के बाद परिजनों ने पुलिस पर बेरहमी से मारपीट करने का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस इसे आत्महत्या का मामला बता रही है। घटना के बाद गुस्साए लोगों ने इंद्रगढ़ थाने का घेराव कर प्रदर्शन किया और पथराव भी किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए बूंदी पुलिस अधीक्षक ने पूरे थाने के स्टाफ को लाइन हाजिर कर दिया है।
पॉक्सो मामले में लिया गया था हिरासत में
जानकारी के अनुसार, इंद्रगढ़ थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति ने 27 फरवरी को अपनी नाबालिग बेटी को भगाकर ले जाने का मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने 8 मार्च को युवती को दस्तयाब किया। इसी मामले में रविवार को करवर निवासी दिनेश सैनी (23) पुत्र मांगीलाल सैनी को हिरासत में लिया गया था। दिनेश पेशे से मिस्त्री बताया जा रहा है।

अस्पताल ले जाते समय बिगड़ी हालत, कोटा में मौत
मंगलवार शाम करीब 6 बजे दिनेश की हालत अचानक बिगड़ने पर उसे इंद्रगढ़ अस्पताल लाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे कोटा रेफर किया गया, लेकिन कोटा पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का आरोप – तीन दिन से थाने में पीट रही थी पुलिस
मृतक के मामा शिवजी लाल सैनी का आरोप है कि दिनेश को पुलिस ने तीन दिन पहले ही पकड़ लिया था और थाने में उसके साथ अमानवीय मारपीट की गई। उनका कहना है कि इसी मारपीट के कारण उसकी मौत हुई है। मौत की खबर फैलते ही मंगलवार रात इंद्रगढ़ थाने के बाहर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
परिजनों और समाज के लोगों ने प्रशासन के सामने रखी ये मांगें
- मृतक के परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा
- परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी
- इंद्रगढ़ थाने के दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई और तबादला
प्रदर्शन के दौरान पथराव, बढ़ाई गई सुरक्षा
प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब कुछ लोगों ने थाने के अंदर पथराव कर दिया। हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमा शर्मा सहित कई थानों का पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया।
पुलिस का दावा – युवक ने लगाई फांसी
मामले में पुलिस प्रशासन और परिजनों के बयानों में बड़ा अंतर सामने आया है। पुलिस अधीक्षक राजेंद्र मीणा ने मारपीट के आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि युवक को धारा 164 के बयान के लिए लाया गया था, जहां उसने मौका पाकर फंदा लगा लिया। एहतियातन पूरे इंद्रगढ़ थाने के स्टाफ को लाइन हाजिर कर दिया गया है और घटना स्थल वाले कमरे को सील कर दिया गया है।
शरीर पर चोट के निशान को लेकर उठे सवाल
इंद्रगढ़ अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. धर्मेंद्र गुप्ता के अनुसार जब युवक को अस्पताल लाया गया, तब उसके गले में निशान थे और हालत बेहद गंभीर थी। वहीं माली समाज के जिलाध्यक्ष चौथमल सैनी ने कोटा अस्पताल में शव देखने के बाद दावा किया कि मृतक के हाथ के पंजे में सूजन थी और गले में फंदे के स्पष्ट निशान नहीं थे। उन्होंने इसे पिटाई से हुई मौत का मामला बताया है।
एडीजी ने दिए निष्पक्ष जांच के निर्देश
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विपिन कुमार पांडे ने कहा है कि घटना की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजा गया है और कोटा रेंज आईजी से भी संपर्क किया गया है। पूरे मामले की नियमानुसार निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी हालात पर नजर रखे हुए हैं।

