Rajasthan News: आज के दौर में जहां एक कप चाय भी ₹10 की आती है, वहीं राजस्थान में ऐसे कर्मचारी भी हैं जो महज ₹28 की दिहाड़ी पर अपना घर चला रहे हैं। राजस्व विभाग के इन ग्राम प्रतिहारियों का सब्र आज टूट गया और उन्होंने बारां कलेक्टर पर प्रदर्शन कर सरकार से सम्मान के साथ जीने का हक मांगा।

बता दें कि यह मामला उन 16,000 परिवारों से जुड़ी है जो राजस्थान की ग्रामीण व्यवस्था को संभालते हैं। यदि पटवार घर की सफाई, पत्थर गड़ी और गिरदावरी करने वाले ये हाथ रुक गए, तो पूरे प्रदेश का राजस्व और आपदा प्रबंधन का काम ठप हो जाएगा।
राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ के बैनर तले अपनी पीड़ा सुनाते हुए कर्मचारी सुरेंद्र कुमार ने कहा कि वे 25 सालों से विभाग की सेवा कर रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें पूरे साल का मानदेय सिर्फ ₹15,000 मिलता है। यह राशि मनरेगा की न्यूनतम मजदूरी से भी कई गुना कम है, जिससे परिवार का पेट पालना अब मुमकिन नहीं रह गया है।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने मांग की है कि उन्हें 12 महीने काम के बदले प्रति माह ₹16,000 का वेतन दिया जाए। महासंघ के प्रदेश सह मंत्री नंदलाल केसरी ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के 16,000 ग्राम प्रतिहारी सरकार से स्थायीकरण और सम्मानजनक मानदेय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
इन कर्मचारियों को उम्मीद है कि सरकार उनके 30 साल पुराने संघर्ष को समझेगी। उन्होंने कहा यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो यह आक्रोश जयपुर की सड़कों पर भी दिखाई देगा।
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