राजस्थान के भीलवाड़ा और राजसमंद जिले की सीमा पर बसे खजुरिया गांव में लगातार रेत खनन हो रहा है. इसे लेकर बजरी माफियाओं के खिलाफ पहली बार महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है. मेवाड़ की जीवनदायिनी बनास के बाद अब चंद्रभागा नदी के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को देख ग्रामीण महिलाएं खुद नदी के बहाव क्षेत्र में धरने पर बैठ गई हैं. महिलाओं का कहना है कि वो अपनी जान दे देंगे, लेकिन नदी से रेत नहीं ले जाने देंगे.

पुरुषों ने साथ नहीं दिया, खुद संभाली कमान
मिसी जानकारी के अनुसार, खजुरिया गांव में लगातार हो रहे अवैध और अंधाधुंध रेत दोहन से क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र बिगड़ रहा है. महिलाओं ने पहले गांव के पुरुषों और अन्य लोगों से इस बारे में बात करने का प्रयास किया, लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला, तो करीब 100 महिलाओं की टोली खुद नदी में उतर गई. यह आंदोलन अब एक जन-आंदोलन का रूप ले चुका है.
महिलाओं के विरोध का सबसे बड़ा कारण गिरता जलस्तर है. ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले 52 सालों से नदी में पानी की पर्याप्त आवक नहीं हुई है. नदी की रेत (बजरी) पानी को सोखकर भूजल स्तर बनाए रखती है, जिसे ठेकेदार निकाल रहे हैं. रेत खनन की वजह से गांव के कुएं सूख रहे हैं, जिससे खेती और पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है.
‘रेत निकाली तो हमारे कुएं प्यासे रह जाएंगे’
गांव की महिलाओं की चेतावनी देते हुए कहा- ठेकेदार हमारी सीमा छोड़कर कहीं भी खनन करे, हमें मतलब नहीं. लेकिन खजुरिया की सीमा से रेत निकाली तो हमारे कुएं प्यासे रह जाएंगे. हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए इस नदी को बचाकर रहेंगी.’
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