Rajasthan Paper Leak Scandal: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के निलंबित सदस्य और पेपर लीक के मास्टरमाइंड बाबूलाल कटारा को देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका लगा है। सोमवार को हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने कटारा की अंतरिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने साफ कर दिया कि ऐसे गंभीर मामलों में फिलहाल कोई राहत नहीं दी जा सकती।

क्यों फंसा फरवरी और मार्च का पेच?
दरअसल, फरवरी के महीने में बाबूलाल कटारा को सेकंड ग्रेड टीचर भर्ती केस में एक छोटी सी उम्मीद की किरण दिखी थी जब कोर्ट ने उसकी अंतरिम जमानत मंजूर की थी। लेकिन, वह जेल से बाहर नहीं आ पाया क्योंकि उस पर SI भर्ती 2021 पेपर लीक और ED (प्रवर्तन निदेशालय) द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के केस भी दर्ज थे। 23 मार्च 2026 की तारीख इसी फैसले की समीक्षा के लिए तय थी, जिसमें आज कोर्ट ने अंतरिम राहत को नियमित जमानत में बदलने के बजाय रद्द करने का फैसला सुनाया।
सरकारी आवास पर रची गई थी साजिश
सूत्रों के अनुसार, कटारा ने अपने संवैधानिक पद की गरिमा को ताक पर रखकर सेकंड ग्रेड टीचर भर्ती 2022 का पेपर अपने सरकारी आवास पर ही लीक किया था। वहीं कटारा ने अपने भांजे विजय डामोर के जरिए पेपर को रजिस्टर में लिखवाया। पहले यह पेपर 60 लाख रुपये में अनिल मीणा को बेचा गया, फिर 80 लाख रुपये में भूपेन्द्र सारण के साथ डील हुई। इस मामले में 24 दिसंबर 2022 को उदयपुर पुलिस ने एक बस पकड़ी थी, जिसमें 49 अभ्यर्थी पेपर रटते हुए मिले थे, यहीं से कटारा के पाप का घड़ा फूटा था।
राजस्थान सरकार ने कोर्ट में जमानत का जोरदार विरोध किया। सरकार का तर्क था कि कटारा जैसे रसूखदार लोग बाहर आकर गवाहों को डरा सकते हैं और सबूतों को मिटा सकते हैं। वहीं, कोर्ट ने यह भी पूछा कि 2.5 साल जेल में होने के बावजूद ट्रायल में देरी क्यों हो रही है और चार्जशीट की क्या स्थिति है।
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