Ram Navami 2026 : अंजनी पुत्र हनुमान की भक्ति को लेकर जहां पूरे देश में गहरी आस्था है. वहीं उत्तराखंड के चमोली जिले का द्रोणागिरी गांव एक अलग ही परंपरा निभाता है. यहां के लोग हनुमानजी की पूजा नहीं करते, बल्कि उनका नाम लेना भी ठीक नहीं मानते. यह परंपरा आज की नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही है.

गांव में भगवान राम की पूजा पूरे श्रद्धा भाव से होती है. रामनवमी पर विशेष आयोजन भी होते हैं, लेकिन हनुमानजी का नाम लेने से लोग बचते हैं. हनुमान, बजरंग, संकटमोचन या मारुति जैसे शब्दों का इस्तेमाल भी यहां नहीं किया जाता. अगर कोई भक्त हनुमान जी की आराधना करता है, तो उसे गांव से अलग कर दिया जाता है.

रामायण काल से जुड़ी है मान्यता

ग्रामीण बताते हैं कि परंपरा रामायण काल की घटना से जुड़ी है. जब युद्ध के दौरान लक्ष्मणजी मूर्छित हो गए थे, लाल. तब हनुमानजी संजीवनी बूटी लेने इसी क्षेत्र में पहुंचे थे. बूटी की पहचान न होने पर वे पूरा पर्वत ही उठाकर ले गए थे. जिससे लक्ष्मणजी के प्राण बच सके.

इसलिए है हनुमान जी से नाराज

ग्रामीणों का मानना है कि यह काम बिना अनुमति के किया गया. उस समय यहां के स्थानीय देवता लाटू देवता साधना में लीन थे और पर्वत का हिस्सा उखाड़े जाने से उन्हें कष्ट हुआ. इसी वजह से गांव के लोगों ने हनुमानजी से दूरी बना ली और आज तक यह परंपरा निभाई जा रही है.

द्रोणागिरी में हनुमानजी का नहीं है कोई मंदिर

पर्वत को देवता मानकर पूजा की जाती है. हर साल जून में यहां विशेष पूजा होती है. जिसमें दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं. देवभूमि उत्तराखंड में जहां हर कदम पर मंदिर मिलते हैं, वहीं यह गांव अपनी अलग मान्यता के कारण हमेशा चर्चा में रहता है. हनुमान जी का कोई मंदिर नहीं है.