अनुदान मांग पर सदन में चर्चा, मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण पर डॉ. रमन सिंह ने सरकार पर साधा निशाना, कहा- इंजीनियरिंग कॉलेजों की भी करते चिंता

सौरभ सिंह ने पूछी भूमिहीन किसान की परिभाषा

रायपुर। विधानसभा में अनुदान मांग पर चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह ने सरकार को आड़े हाथ लिया. उन्होंने कहा कि ढाई साल पूरा होने के बाद अब इस सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. आज पंचायत से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की सारी योजनाएं बंद क्यों है. ढाई सालों में विकास ठहर गया है. इस अनुपूरक से बहुत ज़्यादा उम्मीद नहीं है.

डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कर्ज के बोझ से छत्तीसगढ़ डूबा हुआ है, और मुख्यमंत्री तीस हज़ार करोड़ रुपये खर्च कर नगरनार संयंत्र ख़रीदने की बात करते हैं. चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कालेज ख़रीदने की बात की जा रही है, ऐसा मेडिकल कालेज जो तीन बार बिक चुका है, एमसीआई ने तीन सालों से मान्यता नहीं दी है, और बजट में 37 करोड़ का प्रावधान रखा गया है. बच्चों के भविष्य की बात करके मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण करने की बात करते है, तो फिर चिंता उन इंजीनियरिंग कॉलेजों की भी कर लें, जहां आठ हज़ार बच्चे पढ़ रहे हैं. परिवार का मेडिकल कालेज ख़रीदने के साथ-साथ इसकी भी चिंता कर लेते.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन मुद्दों को लेकर ये सरकार सत्ता में आई, उन्हें भुला दिया गया है. जन घोषणा पत्र की बात अधूरी है. नवयुवक बेरोज़गारी भत्ता का इंतजार कर रहे हैं. युवा बूट पालिश करने पर मजबूर हैं. गरीबों की स्थिति खराब से और खराब होती जा रही है. उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ में कोरोना से मृतक परिवारों के सामने घर मकान बेचने की स्थिति आ गई है. मुझे लगता था कि बजट में इनके लिए कुछ तो प्रावधान होगा. यूपी, एमपी, हिमाचल, दिल्ली जैसे राज्यों में मृतकों के परिवार की चिंता की गई, लेकिन छत्तीसगढ़ में सेस के पैसों से ही कम से कम मदद की जाती. मेडिकल कॉलेज खोलने में जो पैसा बर्बाद कर रहे हैं, यदि इन पैसों को ग़रीबों में खर्च किया जाता तो बेहतर होता.

उन्होंने कहा कि पूँजीगत व्यय में बड़ा हिस्सा एक हजार करोड़ जल जीवन मिशन का है. मूल बजट में 97 हज़ार 106 करोड़ का प्रावधान रखा गया था. इसमें से सिर्फ़ 13 हज़ार 800 करोड़ पूँजीगत व्यय है. 87 फ़ीसदी बजट का हिस्सा ब्याज, पेंशन, अनुदान और सब्सिडी पर खर्च हो रहा है. डेवलपमेंट के लिए पूरे बजट में से सिर्फ़ 13 हज़ार करोड़ है. सारी योजनाएँ बंद हो गई हैं. राज्य का वित्तीय घाटा तीन फ़ीसदी से ज़्यादा नहीं होना चाहिये, ये बढ़कर पाँच फ़ीसदी से ज़्यादा हो गया है. छत्तीसगढ़ में सरकार बनने का सबसे बड़ा नुकसान आवास योजना का हुआ है. सात लाख आवास नहीं बने, लेकिन चंदूलाल चंद्राकर कालेज का अधिग्रहण होगा. यदि ये आवास बन जाते तो ग़रीबों को आशियाना मिल जाता. छत मिल जाता.

रमन सिंह ने कहा कि आयुष्मान भारत जैसी योजना राज्य में बंद हो गई. ये ग़रीबों की योजना थी. बजट में इसका प्रावधान रखा जा सकता था. सरकार वित्तीय स्थिति में जर्जर हो चुकी है. ढाई साल में 39 हज़ार करोड़ से बढ़कर 76 हज़ार करोड़ हो गया है. रफ़्तार से क़र्ज़ लिया जा रहा है. हमारी सरकार थी तब हम डेढ़-दो हज़ार सालाना क़र्ज़ लेते थे, आज 16 हज़ार करोड़ तक सालाना क़र्ज़ लिया जा रहा है. यही स्थिति रही तो आने वाले सालों में क़र्ज़ एक लाख करोड़ से ऊपर चला जायेगा. क़र्ज़ के जाल में ये सरकार पूरी तरह डूब गई है. ये सरकार निगम, मंडल और कम्पनियों के नाम पर भी क़र्ज़ ले रही है. छत्तीसगढ़ में बारह लाख खेतिहर मज़दूर हैं, लेकिन बजट में सिर्फ़ दो सौ करोड़ का ही प्रावधान रखा गया है. इसका औसत निकाला जाये तो मनरेगा मज़दूरों को होने वाले भुगतान से भी ये कम होगा.

सौरभ ने व्यवस्था को लेकर किया सवाल

बीजेपी विधायक सौरभ सिंह ने कहा कि डीएमएफ के पैसे से वेंटिलेटर ख़रीदा गया लेकिन उसे चलाने वाला टेक्नीशियन ही नहीं है. सिटी स्कैन की दो करोड़ की मशीन चार करोड़ में ख़रीद ली गई लेकिन उसके लिए भवन ही नहीं. पूरे प्रदेश में बिजली की कटौती हो रही है. बिजली दफ़्तरों में कहीं इंसुलेटर नहीं है, कहीं ट्रांसफार्मर नहीं है. खराब होने की स्थिति में बीस-बीस दिन बाद आ रहे हैं. इससे लाइन लॉस भी हो रहा है. सरकार ने भूमिहीन कृषक कल्याण योजना शुरू की है, लेकिन सरकार के पास क्या कोई सर्वे है? भूमिहीन किसान की परिभाषा क्या है.

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