बड़ी ख़बर : रमन सिंह का भूपेश सरकार पर बड़ा आरोप, कहा- ‘अपराधियों को गवाह बनाने की ये नई परंपरा देश में ही नहीं, दुनिया में भी लिखा जाएगा’

रायपुर। दंतेवाड़ा उपचुनाव में प्रचार के लिए रवाना होने से पहले रमन सिंह ने भूपेश सरकार बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने नान घोटाले में हो रही कार्रवाई पर सवाल खड़ा करते हुए कहा, कि छत्तीसगढ़ में अपराधियों को गवाह बनाने की नई परंपरा देश में ही नहीं, दुनिया में भी लिखा जाएगा. उन्होंने कहा, कि यहाँ आरोपियों को डरा-धमकाकर गवाह बनाया जा रहा है, जो मुख्य अभियुक्त है, जो चार साल की सजा पा चुका है, उसे सरकारी गवाह बनाया जा रहा है. चिंतामणि को कैसे उठाया गया ये बातें कोर्ट में उनकी ओर से दिए गए शपथ-पत्र के साथ सबके सामने एक्सपोज हो गया है. झूठ और फरेब की सरकार नहीं चलती. जनता सब देख रही है. वहीं उन्होंने यह भी कहा, कि जो भी आरोप हम सरकार लगाना चाहे लगाते रहे हम सारी बातों का हम जवाब दे रहे है. हमें कोई डर नहीं है. हम हर तरीके से जवाब दे रहे है.

वहीं उन्होंने दंतेवाड़ा उप चुनाव को लेकर कहा, कि सिर्फ और सिर्फ भ्रम फैलाने का काम किया जा रहा है. दंतेवाड़ा के इस चुनाव में हम सिर्फ डेवलपमेंट के मुद्दे पर अपनी बात रखेंगे. जनता डेवलपमेंट के मुद्दे पर ही वोट करेगी. उस डेवलपमेंट की जिसे प्रधानमंत्री ने भी सराहा है. दंतेवाड़ा की जनता पर हमें भरोसा है. इसके पहले विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव को लेकर हमारी बेहतर स्थिति रही है. भीमा मंडावी के अधूरे काम को हमे पूरा करना है. 15 साल में डेवलपमेंट दंतेवाड़ा में हुआ. नक्सलगढ़ के रूप में जो पहचान थी, उसे शिक्षागढ़ के रूप में स्थापित करने का काम बीजेपी सरकार ने किया. वहां का एजुकेशन हब देश और दुनिया मे चर्चा का विषय बना. लाइवलीहुड कॉलेज की स्थापना वहां की. दंतेवाड़ा जाना मुश्किल होता था, वहां आज चमचमाती सड़क का विकास किया गया.  मैं इतना दंतेवाड़ा घुमा हूँ. मोटरसाइकिल में अंदरूनी इलाको में गया हूँ. मैं जानता हूँ दंतेवाड़ा की तासीर क्या है. इस बार फिर दंतेवाड़ा की जनता बीजेपी को जिताएगी.

इसके साथ ही रमन सिंह ने बस्तर सांसद दीपक बैज के उस बयान पर पलटवार किया हैं, जिसमें बैज ने कहा था कि बस्तर के आदिवासी अब सहानुभूति को लेकर वोट नहीं करता. रमन ने कहा कि ये गलतबयानी है. कोई ये कैसे कह सकता है आदिवासी संवेदनशील नहीं होता है. सबसे ज्यादा संवेदनशील कोई होता है तो वह है आदिवासी, जिसने नक्सलवाद को भी झेला है. कम पढ़े लिखे होने के बावजूद आदिवासी संवेदनशील है.

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