कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। जगतगुरु रामभद्राचार्य ग्वालियर में बोध पुस्तक विमोचन एवं लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर के पिता कैलाशवासी स्वर्गीय हाकिम सिंह तोमर की रचित पुस्तक का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने मंच से दिग्विजय सिंह के धोखे का जिक्र किया। इसके साथ ही कथित शंकराचार्य पर भी अपनी बात रखी।

रामभद्राचार्य ने दिग्विजय सिंह को बताया धोखेबाज

जगतगुरु रामभद्राचार्य महाराज ने सभाजन को सम्बोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को धोखेबाज बताया। उन्होंने कहा कि जिन दिव्यांगों को लोग असफल मानते हैं, उनके लिये चित्रकूट मध्य प्रदेश में विश्वविद्यालय बनाना चाहता था। लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुझे धोखा दिया। दिग्विजय सिंह ने परमिशन और जमीन नहीं दी। उसके बाद मैंने उत्तर प्रदेश में विश्वविद्यालय बनाया, जहां दिव्यांग शिक्षित हो रहे हैं।

शंकराचार्य को बताया तथाकथित

मंच से उन्होंने शंकराचार्यों को तथा कथित शंकराचार्य बताया। उन्होंने कहा “मैंने कभी जीवन में सिद्धांतों को लेकर कोई समझौता नहीं किया। राम जन्मभूमि का जब समय आया तब तथाकथित शंकराचार्य ने कोर्ट जाने से मना कर दिया। मैंने बताया कि मैं भी रामभद्राचार्य हूं, जब राम के काज के लिए हनुमान बंधन में आ सकते हैं तो मैं राम के कार्य के लिए न्यायालय के कटघरे में नहीं जा सकता क्या? आज परिणाम सबके सामने है।”

PM मोदी के विकसित भारत संकल्प पर कही बड़ी बात

रामभद्राचार्य ने PM मोदी के 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को लेकर का बड़ी बात कही। उन्होंने बताया कि आज भी भारत में 93% लोग अपना निष्ठा से काम नहीं करते हैं। अगर प्रत्येक व्यक्ति निष्ठा से अपना काम करे तो तो मैं दावे से कह सकता हूं कि पीएम मोदी ने 2047 में विकसित भारत की जो बात कही है वह 2037 में ही विकसित हो जाएगा।

किताब और पुस्तक में गंगा और गटर जैसा अंतर

जगतगुरु  रामभद्राचार्य महाराज जी मंच से यह भी बताया कि किताब और पुस्तक में बहुत अंतर होता है। दोनो में उतना ही अंतर है जितना गटर और गंगा में होता है। 

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