RBI Circular Cleanup: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पिछले कुछ महीनों में एक ऐसा काम किया है, जिसकी चर्चा हर जगह है. बैंक ने अपने पुराने नियमों की बहुत ही बड़ी सफाई की है. छह महीने तक चली इस पूरी कार्रवाई में आरबीआई ने सालों से जमा पड़े नियमों और आदेशों को एक-एक करके चेक किया और जो बेकार हो चुके थे, उन्हें सीधे हटाने का फैसला ले लिया.
सबसे दिलचस्प बात ये है कि आरबीआई ने कुल 9,446 सर्कुलर खंगाले. इनमें से 5,673 सर्कुलर खत्म कर दिए गए, क्योंकि या तो उनकी जरूरत नहीं रही या वे बेहद पुराने थे और आज के सिस्टम में फिट नहीं बैठते थे. बाकी बचे लगभग 3,800 से ज्यादा सर्कुलरों को मिलाकर सिर्फ 244 नए मास्टर डायरेक्शन बना दिए गए. आगे से बैंकिंग सिस्टम इन्हीं 244 आसान और साफ निर्देशों के आधार पर चलेगा.
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6 महीने की सबसे बड़ी ‘सफाई’
ये कोई छोटी-मोटी कार्रवाई नहीं थी. आरबीआई की टीम ने महीनों तक बैठकर 1935 से अब तक जारी किए गए नियमों को पढ़ा.
कई सर्कुलर इतने पुराने थे कि आज के बैंकिंग सिस्टम में उनकी कोई भूमिका ही नहीं बची थी.
टीम ने हर सर्कुलर को देखकर तय किया:
- किस नियम की अब जरूरत नहीं?
- किसे अपडेट करना चाहिए?
- किन नियमों को एक साथ जोड़कर सरल बनाया जा सकता है?
इस पूरी एक्सरसाइज का नतीजा यह हुआ कि अब बैंक और वित्तीय संस्थानों को ढेर सारे पुराने कागज़ों से जूझना नहीं पड़ेगा. सबकुछ एकदम साफ और समझने में आसान होगा.
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ये पहचानना भी मुश्किल काम था कि क्या हटे और क्या बचे
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने कहा कि यह काम संस्था के इतिहास की सबसे मुश्किल समीक्षा थी. सोचिए हजारों दस्तावेज, अलग-अलग सालों के नियम, और हर एक को बैठकर देखना कि अब उसकी जरूरत है या नहीं.
टीम को यह भी तय करना था कि:
- कौन-सा नियम रखना है,
- किसे मास्टर डायरेक्शन में जोड़ना है,
- और किसे हमेशा के लिए डिलीट कर देना चाहिए.
अलग-अलग कैटेगरी बनाकर सारा काम बेहद व्यवस्थित तरीके से किया गया.
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इसका फायदा किसे मिलेगा? (RBI Circular Cleanup)
आरबीआई कई सालों से कोशिश कर रहा था कि बैंकिंग नियमों को आसान और कम जटिल बनाया जाए.
इस मेगा-क्लीनअप के बाद:
- नियम पढ़ना और समझना आसान होगा
- बैंकों पर कंप्लायंस का बोझ कम होगा
- गाइडलाइन में कन्फ्यूजन नहीं होगा
- पूरा सेक्टर ज्यादा पारदर्शी तरीके से काम करेगा
यानी अब बैंक और वित्तीय कंपनियां बिना उलझन के काम कर पाएंगी.
सरकार भी पुराने कानूनों की सफाई में जुटी है
केवल आरबीआई ही नहीं, केंद्र सरकार भी पुराने और बेकार हुए कानून हटाने और उन्हें अपडेट करने की प्रक्रिया में लगी है. इसी वजह से वित्त सचिव संजय मल्होत्रा भी लगातार यही बात कह रहे हैं कि नियम जितने सरल होंगे, उतना ही सिस्टम बेहतर तरीके से काम करेगा. आरबीआई का यह बड़ा कदम उसी बदलाव का हिस्सा है.
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