कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। Regional Tourism Conclave: रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव के जरिए ग्वालियर चंबल अंचल और बुंदेलखंड की कला संस्कृति को नए पंख मिले हैं। एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में आयोजित हुए टूरिज्म कॉन्क्लेव के जरिए विलुप्त हो रही कला संस्कृति को एक बड़ा प्लेटफार्म दिया गया है। बात ग्वालियर की बत्तों बाई की गुड़िया की हो तो इसे ग्वालियर के परिहार परिवार की पांचवीं पीढ़ी आज भी जीवित रखी है। 

कागज के खिलौने जिसे ग्वालियर के माहौर परिवार की चौथी पीढ़ी संजोए हुए है। बुंदेलखंड से आए प्रजापति परिवार की पांचवीं पीढ़ी टेराकोटा आर्ट को आज भी लोगों तक पहुंचा रही हैं। इन सभी कलाकारों का कहना है कि ग्वालियर रीजनल टूरिज्म कांक्लेव के जरिए उन्हें जो मंच मिला है।

उसके जरिए उनकी कला को मध्य प्रदेश के साथ ही देश के अन्य इलाकों तक पहुंचने में मदद मिली है। यही वजह है कि उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार का इस आयोजन के लिए धन्यवाद दिया है। 

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