शिखिल ब्यौहार, भोपाल। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के आदिवासियों को अलग धर्म कोड में रखने वाले बयान पर संत समाज ने पलटवार किया है। प्रदेश के साधु संत समाज ने कहा- नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सनातन विखंडन की राजनीति न करें। मामले को लेकर अखिल भारतीय साधु सन्यासी समिति के कार्यकारी अध्यक्ष अनिलानंद महाराज ने बड़ा बयान दिया है।

सनातन के विखंडन का षड्यंत्र स्वीकार नहीं होगा

अनिलानंद महाराज ने कहा- किसी भी राजनीतिक दल के लोगों को सनातन के विखंडन का अधिकार नहीं है। उमंग सिंघार पहले आदिवासियों के पुरातन और धार्मिक इतिहास को पढ़ें फिर ऐसी आपत्तिजनक विखंडन की टिप्पणी करें। सिर्फ वोट की राजनीति के लिए सनातन के विखंडन का षड्यंत्र स्वीकार नहीं होगा। साधु सन्यासी संतों और सनातनियों को राजनीतिक दलों से कोई मतलब नहीं है। हजारों साल पहले सनातनियों के खिलाफ हुए षड्यंत्र से सबक लेना चाहिए। तब सनातनियों के विखंडन कर गुलाम बनाया गया था। राजनीतिक रोटियां सेंकने वाले लोग सावधान हो जाएं। अगर थोड़ी सी भी धर्म की लाज रखते हो तो सनातन को खंड-खंड करने का षड्यंत्र ना करें। आदिवासी सनातन का अभिन्न अंग है।

MP में धर्म पर सियासतः नेता प्रतिपक्ष ने की आदिवासियों को अलग धर्म कोड में रखने की मांग की

आदिवासी समाज अलग धर्म कोड की मांग

बता दें कि मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आदिवासियों को अलग धर्म कोड में रखने की मांग की है। प्रदेश के अनूपपुर में आदिवासियों के एक कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष ने कहा था- आदिवासी समाज अलग धर्म कोड की मांग के लिए अधिक से अधिक आवेदन भेजें। उन्होंने सवाल उठाया कि आदिवासियों के किसी दूसरे धर्म में रख दिया जाएगा तो हमारी पहचान कैसे बचेगी?

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