Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के लिए 1 फरवरी 2026 को 53.47 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश किया। यह 2025-26 के बजट की तुलना में लगभग 5.5 फीसदी अधिक है। 2025-26 का बजट लगभग 50 लाख करोड़ रुपये था। सत्ता पक्ष ने जहां, बजट को विकसित भारत का रोडमैप बताया। वहीं, विपक्ष ने बजट को अधूरा और विकास विरोधी बताया। इन सबके बीच राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने भी बजट को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर बजट को लेकर लिखा- बजट में मध्यम वर्ग को सिर्फ ‘झुनझुना’ थमाया गया है। इनकम टैक्स स्लैब में एक रुपये की भी राहत नहीं दी गई, उल्टे शेयर बाजार में निवेश करने वालों पर एसटीटी बढ़ाकर बोझ लाद दिया गया। नतीजा सामने है-बजट आते ही सेंसेक्स 2800 अंक गिर गया। यह सरकार सिर्फ आम जनता की जेब से पैसा निकालना जानती है, राहत देना इनके शब्दकोश में नहीं है।
देश के इतिहास में यह पहला ऐसा बजट है, जिसमें कछुए और शेर के लिए तो योजनाएं हैं, लेकिन देश का पेट भरने वाले ‘अन्नदाता किसान’ के लिए एक भी ठोस योजना नहीं है। एमएसपी, खाद और खेतीहर मजदूरों पर सरकार ने चुप्पी साध ली है। कृषि बजट में मामूली बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरा है। यह सरकार पूरी तरह से किसान विरोधी है।
उन्होंने कहा कि, आंकड़े गवाह हैं कि यह ‘सूट-बूट की सरकार’ है। आज सरकारी खजाने में आम आदमी (इनकम टैक्स + जीएसटी) का योगदान 36% है, जबकि कॉरपोरेट जगत का सिर्फ 18%। पहले कंपनियां और आम जनता बराबर योगदान देते थे, लेकिन मोदी सरकार ने जनता को निचोड़कर अपने पूंजीपति मित्रों को छूट देने का काम किया है।
राजद प्रवक्ता ने आगे कहा कि, कोठारी कमीशन ने 60 साल पहले कहा था कि शिक्षा पर जीडीपी का 6% खर्च होना चाहिए, लेकिन मोदी सरकार 3% भी खर्च नहीं कर रही। स्वास्थ्य बजट भी जीडीपी के 2% पर अटका हुआ है। जब देश के स्कूल और अस्पताल ही बीमार रहेंगे, तो विकसित भारत का सपना कैसे पूरा होगा? यह बजट देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
शहरों को स्मार्ट बनाने का दावा करने वाली सरकार ने शहरी विकास के बजट में 11.6% की कटौती कर दी है। प्रदूषण से लड़ने के लिए 858 करोड़ आवंटित थे, लेकिन खर्च किया सिर्फ 1 करोड़। बेरोजगारी चरम पर है, लेकिन बजट में रोजगार सृजन का कोई ‘डायरेक्ट प्लान’ नहीं है। सब कुछ हवा-हवाई है, धरातल पर शून्य।
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