24 फरवरी को रॉब जेटन ने नीदरलैंड के पीएम के तौर पर पदभार ग्रहण किया। 38 वर्षीय जेटन नीदरलैंड के इतिहास में सबसे कम उम्र के पीएम बने हैं। जेटन तीन दलों के गठबंधन की अगुवाई कर रहे हैं. वे देश के पहले गे पीएम भी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नीदरलैंड्स के नव नियुक्त पीएम रॉब जेटेन को पद संभालने की बधाई दी है। पीएम ने ये भी कहा भारत और नीदरलैंड्स विविध क्षेत्रों में एक विस्तारित संबंध साझा करते हैं। जेटन ने पूर्व पीएम मार्क रुटे के कार्यकाल के दौरान डिप्टी प्राइम मिनिस्टर के तौर पर भी कार्य किया है और वे जलवायु और ऊर्जा नीति मंत्री भी रह चुके हैं।
जेटन ने क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक अलायंस यानी CDA और पीपुल्स पार्टी ऑफ फ्रीडम एंड डेमोक्रेसी यानी VVD के साथ मिलकर अलायंस बनाया था। 117 दिनों की बातचीत के बाद, जेटन ने अपने D66, CDA और VVD के साथ गठबंधन की सरकार बनाई है। जेटन की गठबंधन की 150 सीटों में से सिर्फ 66 सीटें हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नीदरलैंड्स के नव नियुक्त पीएम रॉब जेटेन को पद संभालने की बधाई दी है। पीएम ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा भारत और नीदरलैंड्स लोगों के बीच आगे बढ़ते संबंधों के मद्देनजर साझे तौर पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी शपथ लेने वाले अपने समकक्ष टॉम ब्रेडेनसन को बधाई दी।
बीते साल अक्टूबर में कड़े चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की है। उन्होंने गीर्ट वाइल्डर्स की अगुवाई वाली इस्माम विरोधी पार्टी फ्रीडम पार्टी (PVV) को बहुत कम अंतर से हरा दिया। प्रचार के दौरान जेटन ने कहा था कि वो नीदरलैंड को फिर से यूरोप के केंद्र में लाना चाहते हैं।
दोनों देश सेमीकंडक्टर और एआई में सहयोग की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा आर्थिक सुरक्षा और फ्रीडम नेविगेशन पर भी सहयोग को लेकर एक समझ बन रही है।
नीदरलैंड्स की राजनीति में पारंपरिक नेताओं के बीच जेटन युवा, ईयू के समर्थक और सामाजिक तौर पर लिबरल चेहरा हैं। उनका गे होना चुनाव प्रचार का हिस्सा नहीं बना, जो अब ग्लोबल राजनीति के बदलते उदारवादी ट्रेंड का प्रतीक है। हालांकि उनकी पहचान एक ऐसे राजनेता के तौर पर हुई जिन्होंने अपने निजी जीवन को छुपाया नहीं।
पीएम मोदी इस साल नीदरलैंड्स जाएंगे। इस बात की जानकारी दो दिन पहले ही दिल्ली स्थित नीदरलैंड्स की राजदूत Marisa Gerards ने दी। उन्होंने ये भी कहा कि ईयू के तहत नीदरलैंड्स में भारत का सबसे बड़ा डायस्पोरा है। 80 हजार की क्षमता वाले इस डास्यपोरा में छात्र हैं, तकनीकी प्रोफेशनल्स हैं, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती का आधार हैं। इनमें से ज़्यादातर भारतीय 19वीं सदी में बिहार और यूपी से सूरीनाम के रास्ते नीदरलैंड्स पहुंचे।
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