जैन समाज की महिलाओं ने आज 24 मार्च को रोहिणी व्रत रखा है। जैन धर्म में रोहिणी व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह व्रत जैन समुदाय के लोगों के लिए विशेष आस्था का प्रतीक है। रोहिणी व्रत हर महीने रोहिणी नक्षत्र के दिन मनाया जाता है। मान्यता है कि यह व्रत रखने से जिवन में सुख और समृद्धि आती है। आकाश मंडल में 27 नक्षत्र हैं l नक्षत्र प्रतिदिन बदलते हैं। जिस दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग बनता है। उस दिन यह व्रत रखा जाता है।

वासुपूज्य को समर्पित होता व्रत

यह व्रत भगवान वासुपूज्य को समर्पित होता है, जो जैन धर्म के 12वें तीर्थंकर हैं। इस दिन रोहिणी व्रत रखा जाता है। रोहिणी व्रत जैन समुदाय का एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है, जो मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली के लिए किया जाता है।

दुखों और दरिद्रता से मुक्ति मिलती है

धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से इस व्रत का पालन करते हैं, वे सभी प्रकार के दुखों और दरिद्रता से मुक्त हो जाते हैं। इस व्रत का पारण रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होने पर मार्गशीर्ष नक्षत्र में किया जाता है।

इस व्रत को करने के नियम

प्रत्येक वर्ष में 10 बार से अधिक रोहिणी व्रत मनाया जाता है और इसे आमतौर पर 3, 5 या 7 वर्षों तक लगातार किया जाता है। इस व्रत की उपयुक्त अवधि 5 वर्ष, 5 महीने मानी जाती है। जैन धर्म में इसे अत्यंत पवित्र व फलदायी व्रत माना जाता है, जिसमें विशेष रूप से भगवान वासुपूज्य की पूजा की जाती है।