Rupee Hit Record Low: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज यानी 30 मार्च को पहली बार 95 के पार पहुंच गया है। रुपया आज 88 पैसे कमजोर होकर 95.58 पर आ गया है। अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से रुपए में ये गिरावट आई है। एक महीने में रुपया करीब 4% गिरा है। वहीं इस वित्त वर्ष में रुपया 10% से ज्यादा टूट चुका है। रुपए की कमजोरी का असर आम आदमी पर भी होगा। इससे विदेशों से इम्पोर्ट होने वाले सामान जैसे मोबाइल, सोना-चांदी, कच्चा तेल खरीदना महंगा हो जाएगा। इससे महंगाई बढ़ेगी। इसी के साथ रुपया एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गई है। यह 1 जनवरी, 2026 से अब तक अमेरिकी डॉलर (USD) के मुकाबले 4.1% गिर चुकी है।

रुपए में इस ऐतिहासिक गिरावट की सबसे बड़ी वजह क्या है?

जवाब: इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल है। खाड़ी देशों के एनर्जी ठिकानों पर ईरान के हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई थी। भारत अपनी जरूरत का 85% तेल आयात करता है, जिसके लिए हमें डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर हो गया।

विदेशी निवेशकों (FIIs) का इसमें क्या रोल है?

जवाब: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने मार्च महीने में अब तक भारतीय शेयर बाजार से लगभग 12.3 अरब डॉलर (करीब 1.15 लाख करोड़ रुपए) निकाल लिए हैं। ग्लोबल अनिश्चितता और युद्ध के डर से विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित ठिकानों जैसे अमेरिकी बॉन्ड्स में लगा रहे हैं। इतनी भारी बिकवाली से रुपए पर दबाव बहुत बढ़ गया है।

‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के तनाव का रुपए से क्या लेना-देना है?

जवाब: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का 20% और भारत का लगभग आधा तेल गुजरता है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस रूट पर सप्लाई बाधित होने का डर है। मार्केट के जानकारों का कहना है कि जब तक इस समुद्री रास्ते पर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक रुपए में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

जानकारों का क्‍या है कहना?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार ने कहा, ‘भले ही RBI का निर्देश फ्यूचर्स मार्केट में अत्यधिक सट्टेबाजी पर रोक लगाएगा। लेकिन, यह करेंसी में आ रही कमजोरी को रोकने के लिए काफी नहीं है। यह कमजोरी कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और मार्केट में FPI की लगातार बिकवाली के कारण बढ़ते ट्रेड और CAD से पैदा हुई है।’

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